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गोरिग्
 


नेता बन गया। सन् १९२७ में डा० गोवेल्स ने बर्लिन से "दिर एग्रिफ' (आक्रमण) नामक एक दैनिक पत्र निकाला। सन् १९२८ में वह राइख़ताग (Reichstag--जर्मन पार्लमेट) का सदस्य चुना गया। सन् १९२६ में वह नात्सी-दल का प्रचार-मंत्री नियुक्त किया गया। जब सन् १९३३ में हिटलर ने जर्मनी का शासन अपने हाथ में लिया, तब वह जर्मन-सरकार का प्रचार-मंत्री नियुक्त किया गया। उसने बहुत शीघ्र जर्मनी के समाचार-पत्रों, साहित्य, कला, रेडियो, संगीत, नाटक, चित्रपट तथा अन्य सांस्कृतिक क्षेत्रों परनात्सीवाद का पूरा नियंत्रण स्थापित कर दिया। ऐसा प्रचार आज तक किसी देश में नहीं हुआ। डा० गोवेल्स जर्मनी में प्रचार की व्यवस्था करता है। वह नात्सीवाद के सिद्धान्तों को जनता में प्रचारित करता है तथा नात्सी-शासन की विशेषताएँ बतलाता है। इसके अतिरिक्त विदेशो में भी वह ऐसा प्रचार करता है जिससे लोगो में जर्मनी के प्रति सहानुभूति उत्पन्न हो। इस कार्य में रेडियो तथा समाचार-पत्रों से विशेषतः काम लिया जाता है। वक्तृता में डा० गोवेल्स का स्थान बहुत ऊँचा है। उसके शब्दो में गूढ रहस्य तथा व्यंग्य रहता है। यदि जर्मनी में गोरिंग शक्ति का प्रतीक है तो गोवेल्स नात्सी-दल के मस्तिष्क का।

गोरिग्, हरमैन विलहैल्म-–गोरिंग का स्थान जर्मनी में हिटलर के बाद है। १२ जनवरी १८९३ मे जन्म हुआ। विगत युद्ध में जर्मन हवाई सेना में भाग लिया। गोरिंग् को स्कूल का वातावरण अच्छा नहीं लगता था और न पढ़ने मे ही उसकी रुचि थी। उसके पिता ने उसे, इसलिए, एक सैनिक स्कूल मे भर्ती करा दिया। सन् १९१३ मे बर्लिन की मिलिटरी ऐकेडेमी से उसे लेफ्टिनेट की पदवी मिली। विगत विश्वयुद्ध मे वह बड़ी वीरता से लड़ा। जुलाई १९२८ में वह अपने शौर्य के बल पर जर्मन हवाई सेना का सेनापति नियुक्त किया गया। इसके बाद वह स्वीडन गया और वहॉ वायुयान-सचालन की शिक्षा दी। परन्तु इससे उसे सन्तोष न हुआ। वहाँ उसने एक धनी स्वीडिश कन्या से विवाह किया। अपनी स्त्री के परामर्श से वह जर्मनी वापस आया। सन् १९२२ में वह म्युनिख में सबसे पहली बार हिटलर से मिला। वह हिटलर के असाधारण व्यक्तित्व से अत्यन्त प्रभावित हुआ। एक सभा में हिटलर को भाषण देते हुए सुनकर गोरिंग् ने अपने मन मे कहा--“यह है वह व्यक्ति