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जिन्ना की १४ माँगें
 


हौसले बहूत बढ गये प्रतीत होते हैं;

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और चूॅकि जापानी एक सामरिक जाती हैं, जापान आज एशिया का सिरमौर बनने सूखस्वप्न देख रहा है। (विशेष जानकारी के लिये देखिये--चीन, तोजो, थाईलेंड, प्रशान्त महासागर का युद्ध)।

जित्रा की १४ माॅगे--सन् १९३८-३९ के बीच, साम्प्रदायिक समस्या को हल करने के सम्बन्ध मे ,गाधीजी, सुभास बाबू, पं० जवाहरलाल नेहरू तथा श्री मुहम्मद अली जिन्ना के बीच, समय-समय पर जो पत्र-व्यवहार हुआ था, उससे यह ज्ञात होता हैं कि साम्प्रदायिक समझौता होने से पूर्व मुसलिम लीग नीचे लिखी शर्तो की पूर्ती आवश्यक समझती थी:-

(१)मुसलिम-लीग की उन माॅगों की स्वीकृति जो सन् १९२६९ मे निर्धारित की गई थी।

(२)काग्रेस न तो साम्प्रादायिक निर्णय (कम्युनल ऐवार्ड) का विरोध करे और न उसे राष्ट्रीयता-विरोधी बतलावे।

(३)सरकारी नौकरियो मे मुसलमानों का प्रतिनिधित्व शासन-विधान द्वारा निर्धिरित कर दिया जाय।

(४)कानून द्वारा मुसलमानों के ज़ाती क़ानून (Personal Law) और संस्कृति की रक्षा की जाय।

(५)शहीदगज की मसजिद वाले आंदोलन मे कांग्रेस भाग न ले और अपने नौतिक प्रभाव से उसके मिलने मे मुसलमानो की सहायता करे।

(६)अज़ाॅ, नमाज़ और मुसलमानो की धार्मिक स्वाधीनता के अधिकार मे किसी प्रकार की बाधा न डाली ज़ाय।