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पाकिस्तान
 


पाइस द्वादश--रोम का २६१वॉ पोप। जन्म २ मार्च १८७६ ई०। रोम मे सन् १९०९-१४ तक धार्मिक (ईसाई) कूटनीति का प्रोफेसर रहा। सन् १९३० में राज्य के धर्म-विभाग का मत्री नियुक्त किया गया। पाइस एकादश का प्रधान सलाहकार रहा। २ मार्च १९३९ को, पाइस एकादश की मृत्यु के बाद, पाइने द्वादश नियुक्त किया गया। पोप रोमन-कैथलिक ईसाई-सम्प्रदाय का प्रधान आचार्य या महन्त है। कैथलिक ईसाइयत सनातनवादी, रूढि-प्रधान सस्था है, जिसके धार्मिक-उपचारो मे ईसा, उनकी माता मरियम, तथा उनके शिष्यो की मूर्तियों के प्रति आस्था और भक्ति-भावना भी सम्मिलित है। रोम कैथलिक ईसाइयों का गढ़ है। पोप यही, अपने वैटीकन मे, रहता है। उसके वहाँ शानदार महल हैं, जहाँ वह राजसी वैभव से रहता है। कैथलिक धर्मानुयायी देशो में पोप का बड़ा प्रभाव है। उत्तरी अमरीका, दक्षिणी अमरीका, ब्रिटेन और रूस को छोडकर संसार की सभी महत्वपूर्ण राजधानियो में पोप के दूत--प्रतिनिधि--रहते हैं।

अठारहवीं सदी तक मव्य इटली में पोप की बढ़ी रियासत थी, जिसे १८७० मे इटली के साम्राज्य में मिला लिया गया। इटली की इस कार्यवाही को स्वीकार करने से पोपों ने इनकार कर दिया। १८२९ तक यह हालत रही कि नये पोप के निर्वाचन के बाद, उक्त कार्यवाही के विरोध स्वरूप, प्रत्येक पोप ने अपने वैटीकन से बाहर जाना बन्द कर दिया। बाद में मुसोलिनी ने पोप और साम्राज्य में समझौता करा दिया है। एक अरब लीरा (इटली का सिक्का) वैटीकन को क्षतिपूर्ति मे दिये गये। अब पोप का आधिपत्य केवल वैटीकन तक सीमित है। वैटीकन--पोप के गढ़--मे उसीकी सत्ता क़ायम है। उतने क्षेत्र मे उसीका सिक्का और डाक-टिकट चलता है।

पोप समाजवाद और साम्यवाद का विरोधी है। वह नात्सीवाद का भी विरोधी है--इसलिए कि हिटलर कैथलिक विरोधी है। इटली के फासिज्म का वह विरोधी नहीं, फिर भी उसने वर्त्तमान युद्ध को रोकने और तदुपरान्त इटली को इसमे शामिल होने से रोकने की व्यर्थ चेष्टाएँ की थीं।

पाकिस्तान--सितम्बर १९३९ मे, योरप मे युद्ध छिड़ जाने के बाद से, मुसलिम-लीग के अधिनायक मि० मुहम्मदअली जिन्ना ने यह ज़ोरो से कहना