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अन्तर्राष्ट्रीय श्रमिक संघ
 

दासता के बंधन में जकड़ी मावनता जाग जा, जाग जा
हम तुरन्त ही पुरानी दशा को बदल देगे--
और धूल को पद-प्रहार कर पुरस्कार जीतेगे।
आऔ,साथियो! आओ रैली करे।
हमे अन्तिम सघर्ष का सामना करना है।
ऐ अन्तर्राष्ट्रीय गीत! मानव जाति एकता के सूत्र मे पिरोदे।"


अन्तर्राष्ट्रीय विधान--ससार के समग्र राष्ट्रों के पारस्परिक राजनीतिक, आर्थिक तथा अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों के नियमन तथा नियंत्रण के लिए समस्त राष्ट्रों की प्रतिनिधि-परिषद् द्वारा निर्धारित उद्देश और नियम। अन्तर्राष्ट्रीय विधान के अन्तर्गत केवल वे ही नियम आते है जिनका महत्व सार्वदेशिक होता है तथा जिन्हे सब राष्ट्र सर्व-सम्मति से या बहुमत से स्वीकार कर लेते है।


अन्तर्राष्ट्रीय श्रमिक संघ--इस संस्था की स्थापना सन् १९२० मे राष्ट्रसंघ के साथ ही उसके विधान की धारा २३ (अ) तथा वसोई की सधि की धारा ३८७-४८७ के अन्तर्गत हुई थी। इसमे राष्ट्रसंघ के सभी सदस्य-राष्ट्र शामिल है, और ऐसे भी राष्ट्र शामिल है जो राष्ट्र-सघ के सदस्य नही है, जैसे सयुक्त-राज्य अमरीका। इसके अन्तर्गत चार उपसस्थाऍ है: (१) अन्तर्राष्ट्रीय श्रमिक सघ-सम्मेलन, (२) कार्य-कारिणी सभा(Governing Body), (३) सहायक सस्थाऍ, और (४) अन्तर्राष्ट्रीय श्रमिक कार्यालय।

अन्तर्राष्ट्रीय श्रमिक सम्मेलन का अधिवेशन एक वर्ष मे एक बार होता है। इसमे मज़दूरों के संबंध की समस्याओ पर विचार किया जाता है और मज़दूरों के संबंध में उनकी स्थिती मे सुधार के लिए निश्चय किये जाते है तथा राष्ट्र की सरकारो से सिफारिश की जाती है। इस बात की भी जाँच की जाती है कि सम्मेलन के निश्चयो और निर्णयों का सरकारे कहाँ तक पालन करती है। प्रत्येक राज्य इस सम्मेलन मे चार प्रतिनिधि भेजता है--दो सरकार के प्रतिनिधि, एक मिल-मालिको का प्रतिनिधि और एक मज़दूरों की ओर से प्रतिनिधि भेजा जाता है। किसी सिफ़ारिश की स्वीकृति या कन्वेन्शन की स्वीकृति के लिए दो-तिहाई का मत आवश्यक है, तथा साधारण प्रस्ताव के लिए बहुमत का नियम है। इस सम्मेलन के प्रतिनिधियों को, सम्मेलन द्वारा