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प्रिवी कौंसिल
 


जर्मनी के विरुद्ध सहायता कर रहे हैं, और रूस में एक पोलिश सेना खडी की गई है। सोवियत सरकार ने भी १९३९ की सोवियत-जर्मन-सन्धि के पोलैण्ट-सम्बन्धी भाग को रद कर दिया है।

प्रभाव क्षेत्र--प्रभाव-क्षेत्र से तात्पर्य ऐसे किसी देश अथवा उसके किसी प्रदेश से है जिस पर किसी अन्य राष्ट्र का राजनीतिक प्रभुत्व तो नहीं होता प्रत्युत् वह अपना प्रभाव रखता है। सन् १९०७ मे फारिस को अग्रेजो तथा रूसियो ने अपना प्रभाव क्षेत्र बना लिया। मन्चूको जापान का प्रभाव क्षेत्र है। वाह्य मगोलिया रूस का प्रभाव-क्षेत्र है। जर्मनी डेन्यूब-प्रदेश को अपना प्रभाव क्षेत्र मानता है। चीन सयुक्त राज्य अमरीका तथा ब्रिटेन और रूस का प्रभाव-क्षेत्र है।

प्रशान्त महासागर का युद्ध--( देखिये--'सुदूरपूर्व का युद्ध')।

प्रान्तीय स्वराज्य--भारत के गर्वनरों के ११ प्रान्तो मे, सन् १९३५ के शासन विधान के अन्तर्गत, जो शासन-प्रणाली स्थापित की गई है, वह प्रान्तीय स्वराज्य के नाम से प्रसिद्ध है।

यद्यपि प्रान्तीय शासन पूर्णतया प्रजातात्रिक अथवा उत्तरदायी शासन नही है--और स्वराज्य तो वह किसी अर्थ मे भी नहीं है--परन्तु जो अर्द्ध-प्रजातत्र-प्रणाली स्थापित होचुकी है उसे पूर्व प्रचलित नौकरशाही से भिन्न करने के लिये ही स्वराज्य (ऑटोनोमी) शब्द का प्रयोग किया जाता है। स्वराज्य का तो अर्थ है अपना शासन।

प्रिवी कौसिल--प्रारम्भ मे यह ब्रिटेन के राजा की सलाहकारी-समिति थी। प्रिवी कौसिल सम्पूर्ण रूप से सलाह देने के अधिकार का प्रयोग नही करती, प्रत्युत् कौसिल के सदस्यो के चुने हुए समूह समय-समय पर कार्य सम्पादन करते है। तीन सदस्यों का 'कोरम' हो जाता है। बस, जब तीन सदस्य अधिवेशन में शामिल होजाते हैं, तब यह घोषणा कर दी जाती है कि "राजा ने प्रिवी कौसिल का अधिवेशन किया है।" इसके बाद आर्डर-इन-कौसिल, शाही घोषणाएँ, तथा शाही कानून पास होजाते हैं। पहले से सरकारी विभाग इनके सम्बन्ध मे सिफारिश कर देते हैं। ब्रिटिश मत्रि-मण्डल प्रिवी कौसिल की एक समिति है। इसलिये मंत्री प्रिवी कौसिलर होते हैं। प्रिवी-कौसिलर