पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/१९९

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फ़्रांस
१९३
 

कारण स्पेन में १९३९ ई॰ तक गृह-युद्ध जारी रहा। इस विद्रोह में उसे इटली तथा जर्मनी से भारी सहायता मिली और प्रजातंत्रवादी स्पेनी सरकार हार गई। मई १९३९ में वह कामिण्टर्न-विरोधी-समझौते में शामिल हुआ। २३ अगस्त १९३९ को हुए रूस-जर्मन-समझौते से वह चिन्तित होउठा, क्योंकि उसने अपने देश में हाल ही में उस प्रजातंत्री सरकार को हराया था जिसकी सोवियत रूस ने मदद की थी। इसलिए स्पेन ने, वर्त्तमान युद्ध के आरम्भ होते ही, अपनी तटस्थता घोषित करदी।

फ्रांसिस्को फ्रांको

परन्तु १९४० के जून में जब इटली युद्ध में कूदा तो स्पेनी फैलेजिस्त (फासिस्त) दल के प्रभाव के समक्ष फ्रांको को झुकना पड़ा और उसने स्पेन को अविग्रही, किन्तु धुरी-राष्ट्र-समर्थक, देश घोषित कर दिया। इस दल का नेता सूनर है, जो फ्रांको-सरकार का प्रभावशाली वैदेशिक मन्त्री और उसका दाहिना हाथ रहा हुआ आदमी है। फेलेजिस्त दल का स्पेन में बहुत ज़ोर है, किन्तु फ्रांको अब तक न तो धुरी-राष्ट्रों में ही शामिल हुआ है और न त्रिगुट में ही।

फ़्रान्स––१९४० से पूर्व पश्चिमी-योरप का एक प्रजातन्त्र। क्षेत्रफल २,१२,६०० वर्गमील, जनसंख्या ४,२०,००,०००। दो धारा सभाएँ थीं––चेम्बर आफ् डिपुटीज़ और सीनेट। चेम्बर का चुनाव सार्वजनिक, चार वर्षों के लिए, होता था। सीनेट म्युनिसिपल कौंसिलों और विशेष मतदात्री संस्थाओं द्वारा चुनी जाती थी। राष्ट्रपति का चुनाव दोनों के सदस्यों द्वारा होता था। मोशियो ए॰ लैब्रन अन्तिम राष्ट्रपति था। शासन पार्लमेन्टरी था और सरकारें जल्द-जल्द बदला करती थीं। सन् १८७१ से, जब फ़्रान्स में जन-तन्त्र