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फिलस्तीन
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स्तीन को भावी अरब-राज्य मे मिला दिया जायगा। पर यहूदी, एक निश्चित संख्या के अनुसार, प्रतिवर्ष आकर फिलस्तीन में बसने लगे। सर हरबर्ट (अब लार्ड सेमुअल) नामक यहूदी को फिलस्तीन में पहला ब्रिटिश हाई कमिश्नर नियुक्त किया गया। इसके बाद कोई यहूदी इस पद पर नियुक्त नहीं किया गया। ट्रान्सजार्डन-प्रदेश फिलस्तीन से पृथक् कर दिया गया और इसे अमीर अब्दुल्ला के अधीन, अँगरेज़ उच्चाधिकारियो की देखरेख मे, अरब राज्य बना दिया गया। इसमे यहूदियो को बसने की मनाई कर दी गई। सन् १९२१ और १९२९ के अरब-विद्रोहों को अँगरेजो ने दबा दिया। पिछले विद्रोह के बाद सन् १९३० मे होप सिम्प्सन तथा पैसफील्ड रिपोर्टो ने यह सिफारश की कि भविष्य मे यहूदियो को इस देश मे प्रवास की आज्ञा न दी जाय, और फिलस्तीन के लिये एक व्यवस्थापिका सभा स्थापित कीजाय, जिसमें स्वतः अरबो का बहुमत हो। यहूदियो ने इसका विरोध किया और योजना स्थगित करदी गई। परन्तु आगामी वर्षों मे जब जर्मनी से यहूदियो को निकाला गया तो पहले से भी अधिक सख्या मे यहूदी फिलस्तीन मे बसने लगे। जहाँ सन् १९२९ मे ५,२४९, सन् १९३१ मे ४,०७५ और सन् १९३३ में ६,५५३ आये थे, वहाॅ सन् १९३४ मे ४२,३५९ और सन् १९३५ मे ६१,८५४ यहूदी आकर एकदम फिलस्तीन मे बस गये। अवैध रूप से जो आ गये थे सो अलग। अरबो मे इससे गहरा आन्दोलन पैदा होगया। जुलाई सन् १९३७ में पील-कमीशन ने, समस्या के निपटारे के लिये, फिलस्तीन के बँटवारे की सिफारश की। प्रस्ताव किया गया कि समुद्र-तट के उत्तरी जिलो में, जहाँ यहूदियो का आधिक्य है, पूर्ण स्वाधीन यहूदी-राज्य और भीतरी फिलस्तीन मे अरबो का स्वतंत्र राज्य स्थापित किया जाय। हैफा का बन्दरगाह और यशलम ब्रिटिश अधिकार में रहे और अरबो को समुद्र-तट की जाफा तक एक पट्टी दे दी जाय। यहूदी राज्य मे इस प्रकार बीस लाख यहूदियों की आबादी की सिफारिश की गई। किन्तु इस योजना का यहूदियो तथा अरबो दोनों ने विरोध किया (यद्यपि कुछ यहूदियों ने इसे पसन्द किया) परन्तु १९३८ में योजना स्थगित करदी गई। फारवरी १९३९ में लन्दन में एक फिलस्लीन सम्मेलन आमंत्रित किया गया। परन्तु इस सम्मेलन की सिफारिशों को भी दानों ने अन्बीकार