पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/२२३

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रोडेशिया, स्वाज़ीलैएड; दक्षिण अफ्रिकी यूनियन; नाइजीरिया, गैम्बिया; गोल्ड-कोस्ट, सीराल्योन; सूदान, टंगान्यिका, दक्षिण-पश्चिमी अफ्रिका, कैमरून, टोगोलैएड ।

अमरीका- बरमुदास, कनाडा की डोमिनियन, फाकलैएड द्वीपसमूह, दक्षिण जार्जिया, बरतानवी गायना, बरतानवी होन्डुरास; न्यूफाउएडलैएड; लेब्राडर; बहामस; बारबाडस, जमैका; लीवार्ड द्वीपसमूह, ट्रिनीडाड, टुबागो, विएडवार्ड द्वीपसमूह ।

महासागरीय- आस्ट्रेलिया की कामनवैल्थ, पापुआ (जिसे जनवरी १६४३ मे वापस जीता चुका है), न्यूजीलैएड, फीजी, प्रशान्त महासागर के द्वीसमूह, न्यूगिनी, पश्चिमी समोआ, नौरू । इनमे

(१) स्वाधीन उपनिवेश- कनाडा, आस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैएड, दक्षिण अफरीका, आयर (आयरिश स्वतंत्र राज्य), न्यूफाउन्डलैएड जिसका ओपनिवेशिक पद १६३३ से स्थगित कर दिया गया है ।

(२) उपनिवेश अथवा अधीन साम्राज्य, जिसमे शाही नौ-आबादियॉ (उपनिवेश), संरक्षित राज्य तथा चिन्हाड्कित बिगत विश्वयुध्द के बाद, वार्सेई की सन्धि के अनुसार, शासनादेश द्वारा शासित देश (Mandated Territories) शामिल है ।

ब्रिटिश राष्ट्र-समूह एक विचित्र राजनीतिक रचना है । राजनीतिक अर्थ मे न वह राष्ट्र है और न सघ ही । उसका न कोई लिखित शासन-विधान है, न उसकी कोई पार्लमेन्ट है और न अपनी सरकार ही । न उसकी रक्षा करने-वाली केन्द्रिय सेना और न प्रबन्धक-शक्ति ही । वास्तव मे यह इतिहास और विकास की रचना है जो अपने आप बढी, योजना बनाकर उसका निर्माण नही किया गया,और जिसके सदस्यो के पारस्परिक सम्बन्ध अभी विकास की अवस्था मे हैं । स्वाधीन उपनिवेशो का विधान बरतानवी सरकार के द्वारा बना, लेकिन वास्तव मे कालक्रम द्वारा वह स्वाधीन बन गये । १६२६ तक वैस्टमिस्टर पार्लमेट समस्त साम्राज्य की सर्वोच्च धारासभा मानी जाती रही; वही अधिकार दे सकती और उन्हे वापस ले सकती थी । पिछले महायुध्द मे उपनिवेशो ने साम्राज्य को पूरी मदद दी और उपनिवेशो ने साम्राज्यान्र्तगत