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अफ़ग़ानिस्तान
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पालन का नियम बना दिया। इसका परिणाम यह हुआ की सन् १९२९ में मुल्लाओ ने अमानुल्ला के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। सयोग से बादशाह की सेना के सैनिको का वेतन बकाया था और सैनिको मे असंतोष था, इसलिए फौज़ भी उसका साथ न दे सकी। वह भारत मे भागकर आगया और यहाँ के रास्ते इटली चला गया। तब से वह वही पर है। इसके बाद अफग़ानिस्तान मे बड़ा भीषण गृह-युद्ध हुआ। अमानुल्ला-विरोधी विद्रोह का नेता एक मामूली भटियारा बन गया। इसका बाप भिश्ती था, इसलिए विद्रोह में इसका नाम ब्च्चा-सक़्क़ा पड़ गया। इसने शासन का भार सँभाल लिया और अमानुल्ला ने जितने सुधार किए थे, वे सब रद कर दिये गये। परन्तु वह योग्य शासक सिद्ध न हुआ। जनरल नादिरख़ाॅ ने, जो इन दिनो पेरिस मे अपने दिन काट रहा था, काबुल वापस आकर बच्चा-सक्क़ा के ख़िलाफ़ विद्रोह का फण्डा उठाया। सीमान्त के वज़ीरियो की मदद से उसने बच्चा-सक़्क़ा को पराजित कर दिया और सन् १९२९ में उसे फॉसी दे दी गई।

नादिरख़ॉ नादिरशाह नाम रखकर अफग़ानिस्तान की राजगद्दी पर बैठा। उसने फिर से देश मे शान्ति और व्यवस्था स्थापित कर दी। ब्रिटिश सरकार से उसने फिर शान्तिपुर्ण संबंध स्थापित किया। अफ़ग़ानिस्तान से रूस का प्रभाव भी मिट गया। ८ अप्रैल सन् १९३३ को, जबकि नादिरशाह एक खेल के अवसर पर पारि-

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तोषिक वितरण कर रहा था, उसका वध कर दिया गया। ऐसा कहा जाता है कि इस हत्या में कोई राजनीतिक रहस्य नहीं था। न्यायालय के एक पदच्युत अफसर के लड़के ने बदला लेने के लिए उसका वध किया। इसके बाद नादिरशाह का बेटा मुहम्मद ज़हीरशाह तख्त पर बैठा। वही बादशाह है।