पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/२४४

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२३६ भारत इस देश-व्यापी घोर दमन से जनता में रोष पैदा होगया शोर पजाब | और सीमाप्रान्त को छोड़कर शेष सभी प्रान्तों में जनता ने सरकार के विरुद्ध विद्रोह करना शुरू कर दिया । रेल की पटरियों उखाड़ी गई । टेलीफोन और टेलीग्राफ के तार काट डाले गये । डाकवाने तथा पुलिस की चौकियों और थाने जला दिये गये अथवा लूट लिये गये । पुलिस तथा फौज के अफसरों की हत्याये की गई। डिपुटी मजिस्ट्रेटो तथा पुलिस कप्तानों ग्रादि पर भी आक्रमण किए गए । सरकारी आफिसों में आग लगाई गई । रेलवे स्टेशन में आग लगा दीगई । मदरास, बबई, विहार और संयुक्त-प्रदेश के पूर्वी भागों में इस विद्रोह ने भयंकर रूप धारण कर लिया। मदरास और बिहार प्रान्त के कई स्थानो पर १००० या इससे भी अधिक मशस्त्र भीड़ ने भयकर उपद्रव फिए । सरकार ने भी इन उपद्रवो के दमन के लिये प्रान्तीय सरकारों को पूरे अधिकार देदिये और भारत में अर्डिनेस-राज और पुलिस-राज का जैसा भयानक दौरदौरा इन दिनो देखने में आया, वैसा ब्रिटिश शासन-काल में शायद ही कभी देखने में आया हो । २४ सितम्बर १६४२ को इस सम्बन्ध में वाइसराय की शासन-परिषद् के कानून-सदस्य माननीय सर सुलतान अहमद ने भारतीय केन्द्रिय असेम्बली के समक्ष अपने भापण में बतलाया किः---- २५० रेलवे स्टेशनों को नष्ट किया गया अथवा उन्हें हानि पहुँचाई गई । ५५० डाकवानों पर हमले किए गए, ५० डाकखाने बिलकुल जला दिये गए और २०० को भारी नुकसान पहुंचाया गया । ३५०० से भी अधिक तार काटने की घटनाएँ हुई । ७० थाने और पुलिस चौकियो और ८५ सरकारी इमारतो पर हमले किए गए । ३१ पुलिस के लोग मार डाले गए और घायलो की संख्या इससे कई गुनी है । १८ फौज के अफसर मारे गये या घायल किए गए। ६० स्थानो पर फौज ने गोली चलाई । ६५८ जनता के व्यक्ति मारे गए । १००० जनता के लोग घायल हुए। सर सुलतान अहमद ने अपने भाषण में कहा कि कुछ हताहत व्यक्तियो को उपद्रवकारी उठाकर लेगए । इसलिए हताहतो की कुल संख्या २००० के लगभग होगी । | २२ सितम्बर को कौसिल आफ स्टेट के समक्ष माननीय सर मुहम्मद उसमान ( डाक तथा हवाई विभाग के सदस्य ) ने अपने भापण मे इन उपद्रवो