पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/२४५

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भारत
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से जो हानि हुई, उसका व्यौरा इस प्रकार बतायाः-

२५८ रेलवे स्टेशनो को नष्ट किया गया । ४० रेलगाडियो को पटरियाँ उखाडकर गिराया गया । ५५० डाकख़ानो पर हमले किए गए। ३,५०० तार काटने की दुर्घटनाएँ हुई । एक लाख रुपये के डाक टिकट तथा नक़द रुपये डाकखानो से लूट लिए गए और असख्य लैटर-बक्स जला दिये गए। ७० थानो पर हमले किए गए । १४० सरकारी इमारतो पर हमले किए गए; उन्हे जला दिया गया अथवा नष्ट कर दिया गया। रेलवे, डाक तथा तार-विभाग को कुल नुक़सान एक करोड़ रुपये का हुआ है । नागपुर ज़िले मे कुल नुकसान सवा लाख का हुआ है । मध्य-प्रान्त के एक दूसरे स्थान मे एक सरकारी ख़ज़ाने में से ३३ लाख रुपये लूट लिए गए, जिसमे १ लाख का पता लग गया है । संयुक्त-प्रान्त में एक निजी दवाख़ाने को नष्ट कर दिया, जिससे १०,०००) की हानि हुई । दिल्ली में सरकारी इमारतो को जो हानि पहुँची है उसका अनुमान ८,८६,६०१) कुता गया है।

इन उपद्रवो के दमन के लिये क्या-क्या उपाय और साधन प्रयोग में लाये गए, उन्हे सर मुहम्मद उसमान ने इस प्रकार बतायाः-

(१) कांग्रेस-समितियों को गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया और महत्वपूर्ण कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया । (२) भारत-रक्षाविधान के अन्तर्गत कारवाइयों कीगई । (३) नये-नये आर्डिनेस प्रयोग में लाये गए, जैसे अधिक दण्ड-व्यवस्था आर्डिनेस ( Penalties Enhancement Ordinance); विशेष अदालत आर्डिनेस (Special Criminal Court Ordinance ) और सामूहिक अर्थ-दण्ड-आर्डिनेस ( Collective Fines Ordinance ) आदि । (४) “देश के हित की दृष्टि से समाचारों के प्रकाशन पर प्रतिबंध लगाये गए। (५) उपद्रवो के दमन के लिये पुलिस को पूरा उपयोग किया गया । उपद्रवकारियो पर गोलियाँ चलाई गई, जिनसे ३६० व्यक्ति मरे और १०६० घायल हुए । ३२ पुलिसवाले हताहत हुए। (६) ६० स्थानों पर ब्रिटिश तथा भारतीय फौजो ने उपद्रवो का दमन किया । कितने ही अवसरों पर गोलियां चलाई गई, जिनसे ३३१ व्यक्ति मरे और १५६ घायल हुए । फौज के ११ व्यक्ति मरे,