पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/२४७

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भारत-सेवक समिति २४३ भारत-मंत्री–ब्रिटिश मंत्रि-मण्डल का एक सदस्य भारत-मंत्री कहलाता है । भारत का शासन-प्रबन्ध इसीके नियंत्रण में रहता है। भारत के शासन के लिये यह ब्रिटिश पार्लमेन्ट के प्रति उत्तरदायी है। भारत का गवर्नर-जनरल लन्दन मे रहनेवाले भारत-मंत्री के आदेशानुसार यहाँ का शासन-सूत्र चलाता है। आजकल मि० ऐमरी भारत-मन्त्री हैं। भारत-मन्त्री के कार्य में सहायता के लिये एक उसकी सलाहकारी समिति होती है । इसमें भारतीय सदस्य भी होते हैं । इस कमिटी मे ६ सदस्य तक नियुक्त किये जाते हैं। उनसे सलाह लेना अथवा उनकी सलाह के अनुकूल कार्य करना भारत-मत्री की इच्छा पर निर्भर है । प्रत्येक सलाहकार को ७,३५० पौड वार्षिक वेतन मिलता है। यदि सलाहकार भारत का स्थायी अधिवासी होता है तो उसे ६०० पौड सालाना अधिक भत्ता मिलता है ।। भारत-रक्षा-कानून-१ सितम्बर १९३६ को, योरप मे युद्ध छिड जाने के कारण, भारत में भी वाइसराय ने युद्ध-घोषणा करदी और ५ सितम्बर १६३६ को गवर्नर-जनरल ने, भारतीय-शासन-विधान की धारा ७२ के अन्तर्गत, भारतरक्षा-श्रार्डिनेस जारी किया। यह आर्डिनेस युद्ध-कालीन स्थिति में ब्रिटिश भारत की सार्वजनिक तथा उसकी हित-रक्षा और कुछ विशेष अपराधो के अपराधियो के मुकद्दमो के विषय में जारी किया गया। इसमे कुल १८ धाराएँ हैं। इस आर्डिनेस के अन्तर्गत भारत-सरकार ने भारत-रक्षा-नियम बनाये हैं । इस मे १३२ नियम हैं । वर्तमान समय में अधिकांश राजनीतिक अपराधियो की जेल-व्यवस्था और उनके मुक़द्दमे तथा नज़रबन्दी, एवं बहुत से साधारण मामले भी, इन्ही नियमों के अनुसार होरहे हैं। नियम ३८, ३९, ४० तथा ४१ के अन्तर्गत राजनीतिक कार्यकर्ताओं को दण्ड दिया जा रहा है और धारा १२६ और १२६ के अन्तर्गत नज़रबन्द । केन्द्रिय व्यवस्थापक-सभा ने इन नियमो तथा आर्डिनेस को बाद में क़ानून का रूप दे दिया है । सन् १६४२और १९४३ मे इसीके अन्तर्गत अनेक शासन-व्यवस्थायें की गई हैं । भारत-सेवक समिति (सर्वेन्टस्-ऑफ इंडिया सोसाइटी)—सन्१६.०५ में स्वर्गीय देशभक्त श्री गोपाल कृष्ण गोखले ने इस संस्था की स्थापना की थी। समिति का उद्देश ऐसे देश-सेवक उत्पन्न करना है, जो देश-सेवा में