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पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/२७१

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मरको
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गया। इस देश में पाया जानेवाला कई प्रकार का कच्चा लोहा जर्मनी के लोहे के कारखानो के लिये दरकार था। साम्राज्यवादियो द्वारा मरक्को की तकाबोटी किये जाने का यह पहला अवसर था। ७ अप्रैल १९०६ को, मरक्को की बॉट-चोट के लिये, "मुक्त द्वार" नीति साम्राज्यवादियो ने तय की और १९११ मे फ्रांस ने मरक्को के फैज़ प्रान्त मे क़ब्ज़ा करने के लिये सेना भेज दी। जर्मनी क्यो पीछे रहता, उसने भी अगादिर बन्दर पर एक हथियारबन्द जहाज़ रवाना कर दिया। मरक्को की नोच-खसोट का दूसरा युग आरम्भ हुआ। तत्कालीन बरतानवी वज़ीरे-आज़म लायड जार्ज ने कहा कि बरतानिया जर्मनी की इस हरकत को बरदाश्त नही कर सकता। लडाई होते-होते बची। फ्रांस-जर्मनी मे समझौता होगया। मरक्को पर फ्रांस का अधिकार क़बूल कर लिया गया, बदले मे जर्मनी को फ्रान्सीसी कांगो मे रिआयते मिल गई।

सन् १९१२ से मरक्को तीन भागो में बँटा हुआ है, एक स्पेनी-क्षेत्र तथा दूसरा फ्रान्सीसी-क्षेत्र। टेंजियर का तीसरा तटस्थ क्षेत्र १९२३ मे बना है और अन्तर्राष्ट्रीय-व्यवस्था के अधीन है। यह तीनो क्षेत्र, नाममात्र को, सुल्तान के प्रभुत्व मे हैं। वर्त्तमान सुल्तान, शरीफी राज-वंश का, सिद्दीक़ मुहम्मद, है। परन्तु फ्रान्सीसी-क्षेत्र मे फ्रान्सीसी रेज़ीडेंट-जनरल ही वास्तविक शासक है। समस्त सरकारी आदेश उसीके द्वारा जारी किये जाते हैं। सारे देश मे फ्रान्सीसी सेनाएँ हैं। रेज़ीडेंट फ्रांस के वैदेशिक मंत्री के प्रति उत्तरदायी है। स्पेनी-क्षेत्र का शासन सुल्तान द्वारा नियुक्त ख़लीफ़ा के हाथ मे है, परन्तु इसकी नामज़दगी स्पेनी सरकार करती है। इस क्षेत्र का असली शासक स्पेन का रेज़ीडेंट है। फ्रान्सीसी-मरक्को का क्षेत्र० २ लाख वर्ग० और स्पेनी-मरक्को का १३ हज़ार वर्गमील है। स्पेनी-क्षेत्र मे भी लडाकू रीफ क़बीले की कुछ आबादी है। रीफ १९२४ से '२७ तक, अपने देश की आज़ादी के लिये, अब्दुलकरीम के नेतृत्व में, फ्रान्सीसी और हस्पानियो (स्पेनियो) से लड़ चुके हैं। फ्रान्सीसी संगीनो और गोलियो के बल पर वह क्रान्ति दबा दी गई थी और रीफ़ों का नेता, अब्दुलकरीम, अबतक एक फ्रान्सीसी टापू मे क़ैद है। सन् १९३६ मे जनरल फ्रान्को ने स्पेन के गृह-युद्ध की तैयारी इसी क्षेत्र मे की थी। मरक्को की सेना ने उसके साथ भाग लिया। सामरिक दृष्टि से यह वडा महत्व-