पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/२८०

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२७४ मिस्त्र

सध की लाल सेना के मार्शल तुवृवाचेवरुकी तथा सात जनरलों पर तीसरा ऐसा ही मामला चला कि वे जर्मन-सेनानायकों से मिलकर रूस तथा स्तालिन के विरुद्ध पडहुत्र रच रहे थे । इनका मुकद्दमा बन्द अदालत औ, गोपनीय देंग से, हुआ । सरकारी बयान के मुताविक इन्होंने भी अपना अपराध स्वीकार किया और इन सबको गोली मार दीगई । ऐसा विचार किया जाता है कि यह मुकदमें साम्यवादी दल की शुद्धि के लिये चलाये गये थे, जिनके अनुसार द्यन्य अनेक विरोधी कम्युनिस्वी को भी मौत की सजाये दीगई। भिगो-मारें-सुधार- १८३ २ के नाम-मात्र के सुधारों के बाद, सन १ ९० ९ मे, भारत के तत्कालीन वाइसराय लार्ड मिएटो तथा भारत्तन्मत्री लार्ड माले ने भारतीय शासन-सुधार की एक योजना बनाई, जिसके अनुसार भारत के प्रत्येक प्रान्त में धारासभा-त् स्थापित की गई तथा उनमे र्थोंडे-से चुने हुए प्रतिनिधियों के लिये भी स्थान रखा गया । कुछ स्थानीय स्वायत्त भी थोडा बढा दिया गया । सबसे प्रथम पृयकूसाम्प्रदायिक निर्वाचन-प्रणाली का" इसी योजना में स्थान दिया गया, और इसीके अनुसार लिखो को, हिंदुओं से अलग सम्प्रदाय मानकर, उन्हें पृथकूअनिर्शयनाधिकार दिया गया मिस्त्र अफीका स्थित 'रुवत्तत्र' राज्य, क्षेत्रफल ३,४८, ०० ० वर्ग० है जन० १,६ ०,० ० ,००० है भाषा अरबी, राजधानी काहिरा, बादशाह फारुक अव्वल राजवश अलवानी तुर्क, मुहम्मदअली शाखा ), जिसका जान्म १ १ फरवरी सन् १ ९२ ० को हुआ । १८४१ से १९१६ तक मिल, तुकों के अधीन, अर्श- स्वतंत्र देश रहा । तुकों की और से एक खान्दानी दृत्रदीव (वाइसराय ) इस पर हुकूमत किया करता था। सत् १८८२ में दृन्दिरेलों ने इस देशपर आधिपत्य कर लिया । १८ दिसम्बर १ ९ १४ को यह त्रिटिश सरक्षित राज्य घोषित कर दिया गया और जर्मन-हिमायती ग्यदीव अव्यास [हिलनी को हटा दिया गया और उसके स्थान पर, सुलतान को उपाधि धारण कर, हुसैन कमाल ग्यदीव बना । कमाल १ ९ १ ७ में मर गया, तब उसका भाई फुआद खदीत्र बनाया गया और १ ९२२ में इसे मिल का पादशाह घोषित कर दिया गया ५ मिसमे, इसके बाद, देश की पूर्ण स्वाधीनता के लिये, ज़बरदस्तराहोवृ दोहा-१ शुरु होगया । २६ अगस्त १९३६ को मिस्ननंवेटेन-सधि द्वारा