पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/२८५

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54 24 - - | मुफ़्ती आज़म || २७६ जेल-यात्रा भी की है। अ०भा० कांग्रेस कमिटी के पुराने सदस्य रहे हैं । आप गुजराती के सुप्रसिद्ध साहित्यकार, लेखक, पत्रकार और उच्च कोटि के उपन्यासकार हैं। गुजराती साहित्य-कोष का सम्पादन भी अपने किया है । सन् १९३७१६३६ तक बम्बई की कांग्रेसी प्रान्तीय सरकार के स्वराष्ट्र-मंत्री ( Home Minister ) रहे । युद्ध के प्रश्न पर काग्रेस मत्रि-मण्डल के साथ अपने भी त्यागपत्र दे दिया । सन् १९४१ मे काग्रेस की साम्प्रदायिकनिर्णय-सम्बन्धी नीति पर गाधीजी से आपका मतभेद होगया और अपने कांग्रेस को त्याग : ** कुर ‘पाकिस्तान के निराकरण मे ‘अखण्ड : हिन्दुस्तान आन्दोलन की नीव डाली । . “सोशल वैलफेयर' नामक साप्ताहिक अपने निकाला है, जिसके द्वारा आप अपने । विचारो का, प्रतिपादन कर रहे है ।। | मुफ्ती आज़म--(यरूशलम का ), इसलाम का धर्माचार्य, अरब का राष्ट्रीय नेता, नाम हज अमीन एफन्दी अल हुसैनी, अवस्था ४५ वर्ष, क़ाहिरा, यरूशलम और कुस्तुन्तुनिया मे तालीम पाई, अपने भाई के बाद, सन् १९२१ मे, यरूशलम का मुफ़्ती बना, सन् १९२३ मे सुप्रीम मुसलिम कौसिल का अध्यक्ष हुआ, १९३१ ई० मे यरूशलम मे मुसलिम कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया । विगत विश्वयुद्व में मुफ़्ती ने, तुकों के ख़िलाफ, बरतानिया का पक्ष लिया किन्तु, फ़िलस्तीन मे यहूदियो को बसाने के प्रश्न पर, वह ब्रिटेन के विरुद्ध हो गया । आज बीस वषों से वह, फिलस्तीन मे यहूदी उपनिवेश बसाये जाने के प्रतिरोध मे, बरतानिया के विरुद्ध, अरबो मे आन्दोलन कर रहा है । उसे १० साल कैद की सज़ा दी गई थी, परन्तु बाद में रिहा कर दिया गया। उसका फिलस्तीन-अरब दल, जो मुफ़्ती दल भी कहलाता है, फिलस्तीन में सबसे बडा दल है । सन् १९३७ मे मुफ़्ती अरब की उच्च संस्था का अध्यक्ष बना। दूसरे अरब नेताओं के साथ मुफ़्ती पर फिलस्तीन मे प्रवेश-निषेध लगाया