पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/२८८

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२८२ मुसोलिनी जर्मन राष्ट्रीय-समाजवादी दल फासिज्म की ही नक़ल थी और यह दल, अपने अस्तित्व के प्रारम्भिक काल से ही, इटली के फासिस्त दल से मैत्री-सम्बन्ध रखे हुए था। लेकिन, सन् १९३४ मे, मुसोलिनी ने, पश्चिमी राष्ट्रों ब्रिटेन और फ्रान्स--से मिल कर, स्ट्रेस का मोर्चा' कायम किया। उसने नासियों के जातीयतावाद का विरोध किया और कहा कि सामी-विद्वेष (Anti Semittstn ) इटालियन जनता की प्रकृति के विरुद्ध है। जब जुलाई में नासियों ने आस्ट्रिया को हस्तगत करने का प्रयास किया तब मुसोलिनी ने, हिटलर के विरुद्व, ग्रास्ट्रिया की सीमा पर लामबन्दी की । लेकिन सन् १९३५ मे, उसने मुल्क वश ( अवीसीनिया ) को जीतने की नीति ग्रहण की और उस पर आक्रमण कर दिया । इटली के विरुद्ध, इस युद्ध मे, राष्ट्रसघ ने दण्डाज्ञाये लगाई तो, पर पूरे बल से नही । यह उसे अबीसीनिया की विजय से न रोक सकीं. अपितु पश्चिमी राष्ट्रो का वह विरोधी हो गया और, इसी कारण, मुसोलिनी हिटलर से मिलकर धुरी-नीति-निर्माण की ओर प्रेरित हुआ । स्पेन के गृह-युद्ध ( १६३६-३६ ) में हिटलर तथा मुसोलिनी की मित्रता और भी प्रगाढ होगई । मार्च १९३६ में हिटलर द्वारा आस्ट्रिया को जर्मन राइव मे मिलाये जाने पर मुसोलिनी मौन रहा । मई में हिटलर को रोम में बुलाकर उसने उसका शानदार स्वागत-सत्कार किया और अगस्त में वुद बलिन गया । हिटलर को प्रसन्न करने के लिये, अपने विचारों के प्रतिकूल, उसने इटली में यहूदी-विरोधी कानून बनाये । म्युनिस्व-समझौते के समय, सितम्बर १९३८ मे, चैकोस्लोवाकी-समस्या के अवसर पर, उसने कूटनीतिज्ञतापूर्वक हिटलर का समर्थन किया और म्युनिस्व मे समझौते पर अपने हस्ताक्षर किये । मार्च १६३६ मे उसने अलबानिया पर अपना अधिकार जमा लिया । इसके बाद उसने फ्रान्स से जिबूटी तथा ट्यनिस वापस करने की मॉग की । उसने यह भी मॉग पेश की कि स्वेज नहर के प्रबन्ध मे इटली का योग रहे । मई १९३९ मे उसने जर्मनी के साथ सैनिक सधि की ।। जब वर्तमान युद्ध आरम्भ हुआ तो इटली आरम्भ में “अविग्रही देश • बनकर हिटलर को बल देता रहा। किन्तु जब फ्रान्स मे बहुत कॉटे की लडाई चल रही थी, तब, १० जून १९४० को, उसने मित्र-राष्ट्रो के विरुद्ध युद्ध