पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/३०१

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२६५ यहूदी विवाह-सम्बन्ध द्वारा एक-तिहाई यहूदी ईसाइयो मे मिश्रित होचुके हैं। पिछली लडाई के बाद जर्मनी मे, इनकी नस्ल को बरक़रार रखने के लिये, जितनी पैदाइश की ज़रूरत थी, उसका केवल सातवॉ हिस्सा पैदा हुआ । एक पीढी के बाद वहॉ शायद यहूदी नस्ल रहती ही नहीं, लेकिन इसी बीच हिटलर इनका विरोधी उठ खड़ा हुआ और उसने अपने जाति-विद्वेष के कारण, जर्मनो के यहूदियो से विवाह-सम्बन्ध पर प्रतिबन्ध लगा दिया। | यहूदियो ने सभ्यता को महत्वपूर्ण योगदान दिया है । ईसाइयत और इसलाम का प्रादुर्भाव यहूदी-धर्म (मूसाइयत ) से हुआ । विज्ञान, कला, राजनीति, साहित्य, उद्योग आदि क्षेत्रो में इस नस्ल के महापुरुषो–स्पिनोज़ा, मैन्दलसोन, दिसराइली, हट्ज़, वेसरमन, एहरीलिच, आइन्स्टाइन और फ्राइड ने-बहुमूल्य सेवायें की हैं । जहाँ भी यह लोग रहे वहाँ उद्योग और व्यवसाय को इन्होने बढाया। सभी यहूदी जातीय-बन्धुत्व के बन्धन में बंधे हुए हैं । कुशल व्यापारी-व्यवसायी होने से इनमें पूजीपतियो की सख्या अधिक है। | यहूदी-विद्वेष-सामी ( Semitic )-नस्ल मे से होने के कारण सबसे पहले जारशाही रूस मे यहूदियों पर अत्याचार होने शुरू हुए । उन पर अभियोग लगाया गया कि यहूदी-नेताशो ने एक गुन सम्मेलन मे संसार पर शासन करने की एक योजना बनाई है । पर यहूदियो के हिमायतियो का कहना है। यह ‘ओख़राना' ( ज़ारकालीन ख़ुफिया पुलिस ) का रचा हुआ जाल था । कुछ भी हो, रूस मे यहूदियो के ख़िलाफ ‘पोग्रम' ( रूसी भाषा का शब्द = विनाश ) शुरू हुआ। इसके अनुसार यहूदी मुहल्लों पर यकायक छापा मारकर कर उनका क़त्ले-श्राम किया जाता था, उन्हे लूटा-खसोटा जाता था और घरों को आग लगादी जाती थी । १९१७ की बोल्शेविक-क्रान्ति के बाद से सोवियत रूस मे यहूदी, अन्य नागरिको की भॉति, शान्ति और सुख से रह रहे हैं। किन्तु अब हिटलरशाही जर्मनी इस सामी-विद्वेष का केन्द्र बन गया है । सामी या यहूदी-विद्वेष, १६वी शताब्दी के अद्ध-भाग से, ‘आर्य अथवा ‘नाडिक' नस्ल के सिद्धान्त के आविर्भाव के कारण, उत्पन्न हुआ । हिटलर ने जर्मन लेखको के ‘आर्य’ और ‘अनार्य सिद्धान्त को सर्वथा ग्रहण किया और जर्मनी मे यहूदियों के विरुद्ध कानून बनाये, जिनके अनुसार यहूदियो को