पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/३१८

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३१२ राष्ट्र-संघ M सेवा में सलग्न रहने के कारण उन्हें दमा होगया है। इसी कारण १६४० के युद्ध- विरोधी सत्याग्रह मे महात्माजी ने उन्हे जेल जाने की अनुमति नहीं दी । 'भारत छाडो' प्रस्ताव के बाद, अगस्त १९४२ मे, पापभी पकड लिये गये हैं। रावट ले, डाक्टर-नाजी नेता, 'जर्मन-मजदूर-मोचे' का अव्यक्ष । यह मोर्चा जर्मनी मे सभी प्रकार के-वैतनिक और दैनिक श्रमजीवी-मज़दूरो की एकमात्र अनिवार्य सस्था है, जो ट्रेड यूनियनो को तोडकर बनाई गई है। यह मोर्चा मजदूरो के हितो का प्रतिनिधित्व नहीं करता । इसका लक्ष्य है मजदूरों का नात्सीकरण और उन्हें वेतन-वृद्धि तथा अन्य अधिकारी की प्राप्ति के लिये हडताल आदि करने से रोकना । फलतः मालिकों और राज-संस्था की हितवृद्धि करना । इस मोर्चे के सदस्यो से चन्दे की ५० करोड मार्क सालाना ग्रामदनी होती है, किन्तु इसके आय-व्यय का कोई लेखा प्रकाशित नहीं किया जाता । सम्भवतः यह धन नात्सी-दल के सचालन और सरकारी कोष मे जाता है। रॉयल डच-शैल-तेल का व्यवसाय करनेवाली संसार मे सबसे बडी कम्पनी । इसके नियत्रण मे ससार भर के एक-चौथाई तेल की पैदावार का व्यापार इसके द्वारा होता है । इसके अधीन अनेक तेल-कम्पनियाँ हैं जो ईस्ट इडीज़, अमरीका, इराक, मिस्र, रूमानिया, ट्रिनीडाड, ब्रह्मा, वेनेज्युला मे तेल निकालती हैं। ___ राष्ट-सघ-वर्साई की सधि के अनुसार, १६२० मे, ससार के राष्ट्रो में परस्पर सहकारिता की वृद्धि तथा युद्धावरोध के उद्देश्य से, राष्ट्रसघ की स्थापना की गई थी। इसका मुख्य कार्यालय जिनेवा (स्विट्जरलैण्ड) मे स्थापित किया गया था । तत्कालीन अमरीकन राष्ट्रपति विल्सन के चौदह सिद्धान्तो में से अन्तिम सिद्धान्त यह था कि ससार के राष्ट्रो की स्वाधीनता की रक्षा के लिये