पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/३४४

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लिनलिथगो, विक्टर अलेक्जेंडर जॉन होप, मारक्किस आफ- जन्म २४ १८८७ एप्रिल १९३६ से भारत के वाइसराय के पद पर नियुक्त हे, (१६४१ मे आपका कार्य- काल समाप्त हो गया, किन्तु एक वर्ष के लिये अवधि बडा दी गई।), कृपि के विशेषज्ञ हे, सन १६२६-२८ में शाही भारतीय कृपि-कमीशन के अव्यज्ञ थे। आपको विज्ञान से भी रूचि है और इस विषय का आपको परिपूर्ण ज्ञान है। सन १६३४ मे आपको मेडिकल रिचर्स कौन्सिल का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इसी वर्ष आपको इम्पीरियल कालिज आफ साइन्स एन्ड टेक्नोलाजी की कार्य- कारिगी परिषद का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। सन १६३४ मे अपकी अध्यक्षता मे ज्वांइट पार्लमेंटरी कमिटी ने भारतीय शासन- सुधार मसविदा [इंडिया बिल] पर अपनी रिपोर्ट तैयार की, जिसके आधार पर भारत के लिये सन १६३८ मे आपने भरतीय पशु-प्रदर्शनी का आयोजन किया। तब से यह मेला प्रतिवर्ष, फरवरी मास मे, नई देहली मे होता है। १६४२ मे, एक वर्ष के लिये, फिर अवधि बढाई गई। अप्रिल' ४३ से, ६ मास के लिये, उनके कार्यकाल की अवधि और बढा दी गई है। लार्ड लिनलिथगो को गान्धीजी का व्यक्तिगत मित्र बताया जाता है। लार्ड कर्जन के बाद आपही इतने लम्बे समय तक रहने वाले भारतीय वाइसराय है।

लुफ्टवैफ- जर्मनी की आकाश सेना। लेटविया- बाल्टिक राष्ट्र- समूह का एक रूसी प्रान्त, जो १६१८ मे स्वधीन राज बना, क्षेत्र० २५,००० वर्ग०, जन० २०,००,०००, राजधानी रीगा, प्रारम्भिक- प्रजातत्रवादी शासन- विधान, मई १६३४ मे, स्थगित कर दिया गया और समस्त राजनीतिक दल भग कर दिये गये। तब से राष्ट्रपती के० उलमास अधिनायक-तंत्र- प्रशाली के अनुसार शासन कर रहा है। साम्यवाद-विरोधी