पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/३४५

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लेनिन ३३६ पुरातन नीति के अतिरिक्त वर्तमान युद्ध में यह देश तटस्थ था । इस देश में १२ फीसदी रूसी और ३ फी० जर्मन है । अक्टूबर १९३९ मे रूस ने इसे अपना सरक्षित राज्य बना लिया, सोवियत सेना ने देश पर पूर्ण अधिकार कर लिया और, अगस्त १९४०, मे इसे सोवियत संघ में शामिल कर लिया गया । अल्पसंख्यक जर्मन, हिटलर की अनुमति से, जर्मनी भेज दिये गये । इस देश के कुछ हिस्से में बर्फ नही पडती, इसलिये यह रूस के लिये एक आवश्यक देश था। जुलाई सन् १९४१ मे जर्मनी ने लेटविया पर अधिकार कर लिया। लेनिन, व्लाडीमीर इलियिच–साम्यवाद का प्रवर्तक, रूसी राज्यक्रान्ति का नेता; २२ अप्रैल १८७० को पैदा हुआ, इसके पिता कालिज में अध्यापक थे, वकालत पास की और मज़दूर आन्दोलन में शामिल होगया, उपनाम लेनिन रखा, असल नाम उलियानाफू था । लेनिन पक्का माक्र्सवादी था । रूसी समाजवादी-दल में उसने क्रान्तिवादी, कभी समझौता न करनेवाला, पक्ष बनाया। १६.०३ में इसका दल, ‘बोलशेविक' नाम से, नरम समाजवादी दल से अलग होगया । सन् १९०७ से १९१७ तक लेनिन, निर्वासन की अवस्था मे, पैरिस, वीयना और ज्यूरिच आदि मे रहता हुआ समाजवादी समारोह में सदैव क्रान्ति का सन्देश देता रहा। १९१४ मे, पिछला महायुद्ध शुरू होने पर, उसने कहा कि समाजवादियो को इसमें मदद न देनी चाहिये। मार्च १९१७ मे, रूस की क्रान्ति के बाद, लेनिन स्वदेश लौटना चाहता था ताकि क्रान्ति मे सक्रिय भाग लेसके । जर्मन सैनिक अधिकारियों ने रूसी दुश्मन से पीछा छुड़ाने के इस मौके को रानीमत समझा और उन्होंने लेनिन को एक मुहरबन्द गाडी मे बिठाकर जर्मनी मे होकर रूस भेज दिया । अप्रैल १९१७ को वह पीटर्सबर्ग आया और बोलशेविक दल का नेतृत्व ग्रहण किया। ट्रान्स्की के साथ उसने जुलाई मे क्रान्ति का पहला संगठन किया, किन्तु इसमें सफलता न मिली । दूसरी बार, ७ नवम्बर १९१७ (उस समय की रूसी जंत्रियों के अनुसार २५ अक्टूबर १९१७ ) को फिर विद्रोह का संगठन किया । इस बार सफलता मिली और नरमदली करेन्स्की सरकार को उखाड फेका गया। लेनिन रूसी सरकार का, जिसका नाम उस वक्त ‘कौन्सिल आफ दि पीपल्स कमिसार' पड़ा था, प्रेसिडेन्ट बना । मज़दूरों तथा मैनिको की सोवियतों