पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/३४९

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वजी़रिस्तान -त्र्प्रफगा़निस्तान तथा सीमा-प्रान्त के मध्य का प्रदेश जहाँ मुसलिम कबीले रहते हैॱ। त्र्प्रँगरेज इस प्रदेश मे डयू रेड-पऋि तक पहुँच गये है | इस प्रदेश म सङके निकाली गई है,किले बनाये गये है त्र्पौर् कबीलो को मदद दी गई है |नवम्बर १६३६ मे वजीरिस्तान मे युद्ध त्र्प्रारम्भ होगया|युद्ध ईपी के फकीर के नेतृत्व मे त्र्प्रारम्भ हुत्र्प्रा |सन २६३७-३८ मे वजीरिस्तान मे त्र्प्रशान्ति तथा त्र्प्रसन्तोष रहा। कबीलो ने हिन्दू त्र्प्रौर त्र्प्रँगरेज दोनो के विरुध्द जहाद छेद दिया |सरकार की त्र्प्रोर से कबीलो के गाँवो पर बम वर्षा की गई |सरकार ने फकीर को पकडने का बडा प्रयल किया ,किन्तु सफलता नही मिली ।दिसम्बर २६३८ मे यह युद्ध समाप्त होगया |सन २६३७ तक इस युद्ध मे सरकार के २३ लाख पौड व्यय हुए| यह कबीले बहुधा त्र्प्रशान्ति उत्पत्र करते रहते है| त्र्प्रफगान सरकार त्र्प्रौर ब्रिटिश सरकार दोनो मे से एक का भी नियन्त्ण यह नही मानते | वफूद-त्र्प्ररबी भापा का शब्द,ग्रथ्र सभ्यमएडल(डेपुतटेशन),२३ नवम्बर २६२८ को,त्र्प्रपने देश,मित्र,के लिये स्वाधीनता को माँग रखने के लिये,तीन सदस्यो का एक सभ्यमएडल ,स्वर्गीय मिस्त्री नेता सत्र्प्रादज गलुल पाशा के नेतृत्व मे,वरतानी हाई कमिश्नर से मिला|२६२३ के चुनाव मे जगलुल पाशा के दल की विजय हुई,फलतः वह प्रधान मन्त्री बने त्र्प्रौर २६२४ मे उन्होने वफूद द्ल की स्थापना की |२६२७ मे जगलुल की मृत्यु होगई,त्र्प्रौर उनके सह्कारी नछास पाशा दल के बने, जो अनेक बार प्रधान मन्त्री रहे और चाजक्ल भी भिनी-सरकार के वजीरे त्र्प्राजम है|२६३८ मे कुछ कार्यकर्ता वफूद द्ल से अलग होगये अौर 'सआदी'नाम मे उन्होने दल पनाया |वफूद ओर सरादी दोनो ही त्र्प्रपने त्र्प्रपने दल का प्रबल नेत्तत्व्