पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/३५७

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विल्की विनोवाजी भी फिर पकड लिये गये हैं । विपिनचन्द्र पाल, बाबू-विपिन बाबू बंगाल के एक प्रभावशाली नेता थे, और समस्त देश मे उनका मान था । तत्कालीन कांग्रेस मे उनका एक स्थान था । वग-भंग के समय उन्होने बंगाल मे स्वदेशी-प्रचार और विदेशी- बहिष्कार तथा राष्ट्रीय-शिक्षा के आन्दोलन को शक्ति प्रदान की। देश भर मे उनके ओजस्वी भाषणो को बडी उत्सुकता से सुना जाता था। लार्ड मिण्टो के समय मे उन्हे एक बार निर्वासन का दण्ड दिया गया । बंगला 'वन्देमातरम्' के संपादक की हैसियत से अरविन्द घोष पर एक मुकद्दमा चलाया गया । विपिन बाबू यह जानते थे कि उनकी साक्ष्य अरविन्द बाबू के विरुद्ध पडेगी। उन्होने गवाही देने से इनकार कर दिया । इस कारण उन्हे ६ मास कैद की सज़ा मिली। ___ काग्रेस मे वह सदैव उग्र राष्ट्रीयदल के साथ रहे इसलिये अपने सम- कालीन बगाली नेता सुरेन्द्रनाथ बनर्जी से उनकी नही पटती रही । समस्त भारत मे उस युग मे तीन नेताओं की धाक थी : बाल (लोकमान्य बालगगाधर तिलक ), लाल ( पजाब-केसरी लाला लाजपतराय ) और पाल ( बाबू विपिन चन्द्र ) । एक बार आप योरप भी गये । अगरेज़ी और बॅगला के ओजपूर्ण वक्ता और प्रभावशाली लेखक थे । अनेक पत्रो का सम्पादन किया । सय्यद हुसैन के बाद प्रयाग के 'इन्डिपेन्डेन्ट' का सम्पादन करते रहे । इसके बन्द होने पर प्रयाग के अँगरेज़ी साप्ताहिक 'डेमोक्रेट' का भी सम्पादन किया । १६१६ के अमृतसर-अधिवेशन के बाद वह काग्रेस को छोड बैठे। पजाब-सरकार ने, इस अवसर पर, उनके विरुद्ध प्रवेश निषेध लगा दिया था । किन्तु विपिन बाबू इसको तोड कर अमृतसर पहुंचे थे। उनका अन्तिम सार्वजनिक भाषण १६२८ के सर्व दल सम्मेलन मे हुआ । जीवन के अन्तिम दिनो मे वह व्यक्तिवादी बन गये थे और 'इंगलिशमैन' मे लेखा लिखा करते थे । सन् १९३१ मे उनका देहान्त होगया। . विल्की, वैन्डल ल्यूइस-अमरीकी राजनीतिज्ञ; जाति का जर्मन, ६२ वर्ष पूर्व जिसके जर्मन परखे अमरीका मे आ बसे थे; जिसका खानदानी नाम, जर्मन-उच्चारण के अनुसार, 'विलिके' (Willicke) है; इंडियाना विश्व-