पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/३६२

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वेवल साह्ब रए-नीति तथा सेन्य-सचालन मे प्रय्तन निपुए है। इसलिये अमेरीका तथा ब्रिटेन कि सरकारो की ओर से प्रशान्त महासागर क्र लिय्रे आपको सन् १६८२ मे प्रधान स्रेनाध्य्क्श नियुक्त किया गया।

 आप अग्रेजी के कुशल लेखक भी है। कई उत्क्रष्ट और सुन्दर पुस्तके लिखि है। अग्रेजी लेखन-शैली पर आपको अधिकार प्राप्त है।
 वैटीकन-- ईसाई मत के रोमन कैथलि सन्प्रदाय के मह्न्तचार्य्य--पोप--का निवास-स्थल वैटीकन सिटी के नाम से प्रसिध है। धर्माचार्य्य पोप की यह रियासत एक स्वतन्त्र राजभुमि है, जिसका शेत्रफल १० एकट है। सन्सार की इस सबसे छोटी स्टॅट के मुख्य दाव्र्रो पर स्विस द्व्वारपाल, अपनी विचित्र वेषभुषा मे, प्रह्ररी रेह्ते है। वेटीकन ने अनेक राजभवन है, किन्तु पोप इनमे से एक के कोने ने सादे कमरो मे रहता है। वेटीकन मे एक राज्य की भान्ति, वेतार का तार,रेडीयो,ट्कसाल,डाकविभाग, डाक-टिकट, रेलवे(२०० गज लम्बी) सब अपने है।
     वैधानिक-सन्कट-सित्मबर १६३६ मे योरप मे युद्ध आरम्भ होजाने के बाद जब भारतीय का कागेस ने ब्रिटीश् सरकार से उसके युद्ध-उद्देश पूछे ताकि भारत को युद्ध मे सम्मिलित करने की निति स्पष्ट हो जाय,और ब्रिटीश और ब्रिटीश सरकार ने इसे स्वीकार नही किया, अपने युद्ध-उद्देश नही बताये, तब भारत के आट प्रान्तो मे, जहा कागेस-मति-मएडलो का शासन था, कागेसी सरकारो के त्यागपतत्र दे देने से, वैधानिक सकट पैदा होगया। शासन-विधान-स्थगित कर दिया गया और प्रान्तीय गव्र्र्न्रर सलाह्कारो की सहायता से शासन करने लगे। तब से आज तक भारत के वैधानिक की यह समस्या बिना सुलझी हुई पडी है। गान्धीजी आदि कांग्रेसी नेताओ के प्रयास भी, इस सम्बन्ध मे,विफल रहे और अगस्त १९४२ मे, "भारत छोडो' प्रस्ताव के बाद यह

समस्या ओर भी दुरूह होगई है । अगस्त '४२ के बाद सर तेज बहादुर सभु, श्रीराज़गोपालाचारी आदि इसके सुलझाव के लिये प्रयत्नशील हैं । हिंन्दूमहा'सभा भी अपने इस प्रयत्न में असफल रहीं है । प्रयत्न अब भी जारी है। वैल्स, सुसमर-संयुक्र-राज्यअमरीका का उपराष्ट्रपति-ची; ( ८९२ में पैदा हुआ; हरवर्द विश्वविद्यालय में पढा, ( ९३१५ में राज्य के कूटनीतिक-विभाग