पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/३६३

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


वोरोशिलाफू मे आया; तोक्यो, क्यूबा आदि मे अमरीका का राजदूत रहा । मध्य और लातीनी अमरीकान-सम्बन्धी कूटनीतिक विभागो मे काम करता रहा । १६३३ मे उपराष्ट्र मत्री बना । पुन: राजदूत बनाकर भेजा गया और २१ मई १९३७ से उपराष्ट्र मन्त्री है । अमरीका की वैदेशिक नीति के सम्बन्ध मे राष्ट्रपति रूज़- चैल्ट ओंर राष्ट्र-मन्त्री ( सेकैटरी आफ स्टेदू) कार्डल हल के बाद वहाँ तीसरा नम्बर वैल्स का है । वैस्टमिस्टर-कानुन-इसके अनुसार ब्रिटिश उपनिवेशी की ब्रिटिश-साम्रा- ज्यान्तर्गत पारस्परिक समता की स्थिति कानूनी रूप से स्वीकार की गई है।

     वोरोशिलाफू मार्शल क्कीमन्त यफे मोविचू-जन्म १८८१ ई० ; ग्ररीब चाप का बेटा, इसलिये बाल्य-काल में लोहे के कारखानों में मज़दूरी करनी पडी; रूस के क्रान्तिकारी आन्दोलन में भाग लिया; बार-बार देश-निकाले की सजा देकर साइबेरिया भेजे गये । सत् १६१७ की कान्ति में भाग लिया । रूस के गृहयुद्ध ( १६१८-२० ) के समय एक सेना का सगठन किया सन् १६१६ में वह सोवियत सवार-सेना के सेनापति नियुक्त् किये गये।

९६२५ से १६४० तक रूस के युद्ध-मंत्री ( वार कमिसार ) रहे । इस पद पर रहकर बोरोशिलाफ ने लाल-सेना का नये ढंग से संगठन किया ।१६२१ से वह कम्युनिस्ट पार्टी की केन्द्रीय समिति के सदस्य है।मई १६४० में उन्हें युद्ध मन्त्रि-पद से हटाकर कौन्सिल आफु पीपल्स क्रमिसार्म का उप-प्रधान नियुक्त किया गया । जुन १६४२ मे रूस-जर्मन युद्ध छिड्ने पर मार्शल वोरोंशिलाफ को राष्ट्र- संमिति ( स्टेट डिंफेन्स कमिटी ) का सदस्य और उत्तरी युद्ध-क्षेत्र ( लेनिनग्राद के बचाव ) का प्रथम प्रधान सेनापति नियुक्त किया गया । पीछे आपको, पूर्वीय रूस भे नई सोवियत सेना संगठित करने का दायित्व भी सोपा गया । आपकी कमान में रूसी लाल सेना ने महत्त्वपूर्ण विजय प्राप्त की है और चराचर प्राप्त कर रही है ।