पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/३७०

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३६४ राष्ट्रों ने इस निर्णय को अस्वीकार किया । अतएव अमीर फैज़ल को शाम छोड़ देना पड़ा और वह शाम के बजाय इराक़ का बादशाह बन गया । कई वार के विभाजन के बाद शाम को चार राज्यों में बॉटा गया : मुख्य शाम, क्षेत्र० ४६,००० वर्ग०; जन० २० लाख, राजधानी दमिश्क । लेवानन, क्षेत्र० ३८ सौ वर्ग०, जन० ७ लाख, राज० वैस्त, फ्रान्सीसी शासक भी यहीं रहता है । लताक़िया, क्षेत्र० २८ सौ वर्ग०; जन० ३|| लाख; और जबल | टू ज़, क्षेत्र० २४ सौ वर्ग० जन० ५० हजार, जहॉयुद्धप्रिय मुसलिम वर्गाबाद है । शाम में ३ लाख ख़ानाबदोश बद्द भी हैं । उक्त चारों राज्यों में पारस्परिक राजनीतिक सम्बन्ध नहीं है । पूर्वकालीन शाम-देशीय संघ का अन्त १६२४ | में चुका है । अलेक्जेन्डु टो का इलाक़ो १६३८ में तुर्की को दिया जा चुका है ।। शाम में स्वाधीनता के लिये अरव-राष्ट्रीयता का प्रवल आन्दोलन जारी है, और शाम १८४७ से राष्ट्रीयता का उद्गम क्षेत्र रहा है । १६२० से १६३२ तक, फ्रान्सीसी-शासन के विरुद्ध, वहाँ बहुत से विद्रोह हुए | अखिलअरब-वाद उनके आन्दोलन की पृष्ठभूमि है। नवम्बर-दिसम्बर १९३६ में फ्रान्स के साथ दो सन्धियाँ हुई, जिन पर तीन वर्ष बाद अमल होने वाला था, और इस प्रकार मुख्य शाम और लेबानन को स्वाधीनता दी जाने वाली थी । बदले में इन दोनों राज्यों को फ्रान्स के साथ मित्रता और व्यापारिक | सन्धियॉ करनी पड़ीं और राज्यों में फ्रान्सीसी फौजों का रहना स्वीकार | किया गया । सन्धिकर्ता दोनों देशों में मुख्य शाम राष्ट्रीयतावादी है और लेबानन में | ईसाई अधिक हैं। उनकी फ्रान्स से सहानुभूति थी और वह अपने देश में | तिरगा फ्रान्सीसी झडा लगाते थे । लेबानन के ईसाई यहूदियों के भी पक्षपाती हैं । उक्त सन्धियों पर अमल का वक्त भी न आया था कि वर्तमान युद्ध छिड़ गया । जर्मनो द्वारा शाम पर कब्जा होने की जब सम्भावना बढ़ गई, विशी फ्रान्स के इशारे पर उन्होंने देश में आना शुरू कर दिया, तब, ८ जून १९४१ को, बरतानवी और आज़ाद ,फ्रान्सीसी २ फ़ौजे शाम में दाखिल होगई।