पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/३७२

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३६६ शासन-विधान लिखी हैं । सन् १९३६ से श्री सुभाषचन्द्र बोस द्वारा स्थापित अग्रगामी दल के संगठन का कार्य कर रहे थे । सन् १९४२ के प्रारम्भ में अाप नजरबन्द कर दिये गये । । शासन-उत्क्रान्ति--सहसा सरकार में बलपूर्वक परिवर्तन, जो शासन-मूत्रसचालक सरकारी वर्ग अथवा सैनिक अफसरों द्वारा किया गया हो । राज्यक्रान्ति (Revolution) तथा शासन-उत्क्रान्ति (फ्रान्सीसी भाषा के शब्द Coup detat) मे अन्तर यह है कि क्रान्ति में देश की अधिकाश जनता भाग लेती है और शासन-उत्क्रान्ति मे केवल राजकीय सत्ताधारियो, विशेषकर सैनिकदल, द्वारा शासन में परिवर्तन किया जाता है। योरप के देशो में अनेक उत्क्रान्तियाँ हुई हैं : नेपोलियन प्रथम ने १७६६ में, नेपोलियन तृतीय ने १८५१ मे, मुसोलिनी ने १९२५ में, पिल्सुदृस्की ने पोलैन्ड में १६२८ में इम प्रकार की शासन-उत्क्रान्ति की । ब्रिटिश इतिहास में केवल क्रॉमवेल इस प्रकार का उदाहरण है । शासन-उत्क्रान्ति का प्रयत्न असफल भी हुआ है, जैसे १६२० में जर्मनी का कैप पुत्र । लातीनी अमरीका में तो यह उत्क्रान्ति वहॉ की राजनीति का एक अंग बन गई है। पहले युग में उत्क्रान्तिकारी केवल सरकारी भवनों पर कब्ज़ा करते थे, किन्तु आधुनिक युग में वह रेलवे, रेडियो केन्द्र, बिजलीघर, वाटरवक्स तथा अन्य कारख़ानों पर भी अधिकार कर लेते हैं । शासन-परिवर्तन-प्रजातत्र राज्यो में सामान्यतया मत्रि-मण्डल वैधानिक रूप से बदलते रहते और तदनुसार सरकारे कायम होती रहती हैं । इसमे न कोई उत्क्रान्ति होती है और न हिसा ही ।। शासन-विधान-किसी भी प्रजातन्त्रवादी अथवा अन्य राज्य का वह मौलिक विधान जिसके अनुसार राज्य का शासन-प्रबन्ध होता है । प्रजातन राज्यो मे प्रजा के निर्वाचित प्रतिनिधियो द्वारा संगठित विधान-निर्मात्री-परिषद् द्वारा शासन-विधान बनाया जाता है । इस विधान में देश की कोई धारासभा परिवर्तन नहीं कर सकती । जहाँ लिखित विधान होता है, वहाँ ऐसा ही नियम है । ब्रिटेन मे पार्लमेट ही सर्वोच्च विधान परिषद् है। इसलिये उसे विधान - बनाने या उसमे सशोधन करने का पूरा अधिकार है।