पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/३७७

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


सत्यमूर्ति,एस० - सुप्रसिद्ध कांग्रेसी विधानवादी नेता;जन्म १८८७ ई०; बी०ए० एलएल० बी०; मदरास हाईकोर्ट के सुप्रसिद्ध ऐडवोकेट थे। सन १६१६ में कांग्रेस-डेपुटेशन के सदस्य की भॉति और सन १३२५ मे स्वराज्य दल के प्रतिनिधि होकर इँगलैंड गए। मदरास की अनेक शिक्षा-संस्थाओं के सभा-पति थे। मदरास प्रान्तीय कौंसिल और अ०-भा० कांग्रेस कमिटी के सदस्य रहे। सहकारी समितियों तथा कमीशनों के सदस्य रहे और उनके सामने बयान दिए। तामिल नाड प्रान्तीय कांग्रेस कमिटी के सभापति रहे। सविनय अवज्ञा आन्दोलन में तीन बार जेल यात्रा की। केन्द्रिय लेजिस्लेटिव अस्सेम्बली के प्रमुख सदस्य तथा केन्द्रिय असेम्बली कांग्रेस-पार्टी के उपनेता थे। आपके तर्कपूर्ण और प्रभावशाली भाषणों से असेम्बली के सरकारी हलकों मे चिन्ता उत्पन्न होजाती थी। 'भारत छोडो' प्रस्ताव के बाद आपको ११ अगस्त '४२ को पकड कर नजरबन्द कर दिया गया था, किन्तु जेल मे सख्त बीमार होजाने के कारण १० जनवरी '४६ को मद्रास के जनरल अस्पताल मे लाये गये और २ फरवरी को रिहा कर दिये गये। २८ मार्च को अस्पताल में ही उन्का देहान्त हो गया।

सत्याग्रह - शाब्दिक विभक्ति सत्याग्रह अर्थात सत्य के लिये आग्रह : व्यक्ति या व्यक्त्ति-समूह द्वारा किसी लक्श्य की प्राप्ति के लिये सत्य पर आश्रित रहकर अहिंसात्मक प्रतिरोध य प्रयास। महात्मा गांधी ने इस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम दक्षिण अफ्रीका के भारतीय आन्दोलन मे किया। महात्मा गांधी ने अपनी 'हिन्द स्वराज्य' नामक पुस्तक मे लिखा है -

" सत्याग्रह को अँग्रेजी मे Passive resistance (निष्क्रिय प्रतिरोध) कहा जाता है। यह शब्द उस तरीके के लिये काम मे लाया गया है जिसमें लोगों ने अपने अधिकार प्राप्त करने के लिए स्वयं कष्ट उठाया है। शस्त्र-