पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/३७८

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के प्रति उत्तरदायी हो और समस्त विभाग भारतीयों को सौप दिए जायँ।

मार्च,४२ मे आपने नई देहली में सर स्टैंफर्ड क्रिप्स से भेंट की और अपनी उक्त्त मॉगों पर जोर दिया। आपको कई वर्ष पूर्व सरकार ने 'सर' की उपाधि प्रदान की थी। आप प्रिवी कौंसिल के भी सदस्य हैं। भारत के वर्तमान वैधानिक संकट के निवारण के लिये आप निरन्तर प्रयत्नशील हैं, और अगस्त १६४२ में 'भारत छोडो' प्रस्ताव के बाद उत्पन्न हुई स्थिती मे, भारत की एकमात्र सार्वजनिक संस्था कांग्रेस के दमन के बाद, आप ही देश की स्थिति सभालने का प्रयत्न प्रमुख रूप से कर रहे हैं। फरवरी १६४३ मे, महात्मा गान्धी के २१ दिन के व्रत के समय,आपकी अध्यक्षता मे ही, सर्वदल सम्मेलन हुआ और ब्रिटिश प्रधान-मन्त्री मि० चर्चिल को तार भेजा गया। आप और आपके सहयोगी श्री राजगोपालाचारी, आदि अब भी इस दिशा में प्रयत्नशील हैं।

समाजवाद-सार्वजनिक सम्पत्ति और सुगठित आर्थिक-व्यवस्था की एक प्रणाली तथा एक राजनीतिक आन्दोलन। इसी प्रणाली की स्थापना करना समाजवाद का उद्देश है। १६वीं शताब्दि के पूर्वार्द्ध-कालमें आधुनिक समाजवाद के अनुकूल आदर्श मानव-संस्थाओं की कल्पना पुस्तको मे की गई। इससे भी बहुत पूर्व,सबसे पहले, सर टामस मोर (काल १४७८-१५३५) ने अपनी 'यूटोपिया' नामक पुस्तक मे आदर्श समाजवादी संस्थाओं की कल्पना की। सर टामस के मत के अनुयायी अपने उद्देश की सिद्धि का साधन क्रान्ति को नहीं प्रचार को मानते हैं। १७७२ और १८३७ के बीच फ्रान्सीसी लेखक एफ० सी० फौरियर ने इस प्रकार के समाज की कल्पना को व्यावहारिक रूप देने के लिये संस्थाओं की स्थापना की। सन् १७७१-१८५८ मे राबर्ट ओइन नामक कपडे के एक कारखानेदार ने इस प्रकार का एक आदर्श