पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/४००

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३६६ स्तालिन उसने पीछे मास्को के मुकदमे चलाये । ___मन् १६३४ से १६३८ तक साम्यवादियों ने मसार में यह प्रचार किया कि स्तालिन नात्सीवाद के विरुद्ध है । वह हिटलर के विरुद्ध पाश्चात्य राष्ट्रो से सहयोग चाहता है । १० मार्च १६३६ को स्तालिन ने नात्सी जर्मनी को अाक्र- मक और बरतानिया और फ्रान्स को अनाक्रमक राष्ट्र बतलाते हुए कहा- "हम उन राष्ट्रो की सहायता के लिये है जो याक्रमण के शिकार हुए हैं तथा जो अपने देशों की स्वाधीनता के लिये लड़ रहे हैं।" किन्तु जब पोलैंण्ड के प्रश्न पर फ्रान्स, ब्रिटेन तथा रूस में सधि-वार्ता चल रही थी तब, २३ अगस्त १६३६ को, स्तालिन ने हिटलर के साथ अनाक्रमक-मधि करली और पोलैंड के विषय मे उसको स्वतन्त्रता दे दी तथा जर्मनी और पोलैण्ड के पन्द्रह दिन के युद्ध के बाद, सितम्बर १६३६ मे, स्तालिन ने हिटलर के साथ पोलैण्ड का बट- वारा कर लिया । युद्ध मे तटस्थ रहने की स्तालिन की स्पष्ट इच्छा के बावजूद हिटलर ने, २२ जून १६४१ को, सोवियत संघ पर आक्रमण कर दिया और तब से स्तालिन ब्रिटेन और अमरीका के साथ मिलकर नात्सी-आक्रमण का मुकाबला कर रहा है । स्तालिन एक यथार्थवादी राजनीतिज है।छात्स्की ने उसे ।। क्रान्ति का विश्वासघाती कहा है, किंतु अन्य लोग उसे विश्व-साम्यवाद का नेता मानते हैं । उसके शासनकाल मे रूस एक महान् शक्ति बनगया है । यद्यपि ससार के अन्य भागो मे साम्यवाद की विजय नही हुई है, तथापि यह तो निश्चय है कि स्तालिन के रूस मे समाजवादी आथिक और सास्कृतिक व्यवस्था का पर्यात विकास हुआ है। रूस मे स्तालिन की तुलना महान् पीटर से की जाती । पीटर के लिये व्यक्तिगत रूप से लि के हृदय मे भी आदर है।१६४१ . - ( M 7 - x ma & F M IIFA KA . २. "C