पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/४२९

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४२४ हिटलर अनुसार चैको० जर्मन-'सरक्षण में चलीगई। हिटलर ने दाशा को 'सरक्षित' प्रदेश बोहेमिया और मोराविया का दिखाऊ राष्ट्रपति बना रहने दिया। हिटलर, एडोल्फ-जर्मनी का अधिनायक; २० अप्रैल १८८९ को ब्रॉनों (आस्ट्रिया) मे पैदा हुया, इसका पिता कस्टम्स अफसर था, लिंज़ (ग्रास्ट्रिया) मे, जो उस समय अखिल-जर्मनवाद का गढ था, हिटलर ने चौथी श्रेणी तक शिक्षा प्राप्त की, वहीं से हिटलर की विचारधारा पर अखिल-जर्मनवाद का गहरा प्रभाव पड़ा । रंगसाज ( पेन्टर ) बनने की वाला से वह वीयना गया, किन्तु वीयना के कला-विद्यालय की प्रवेशिका परीक्षा में वह असफल रहा। अतः कुछ समय तक वह वीयना में राज ( मैमार ) का काम करता रहा । उपरान्त पोस्टकार्डो पर चित्र बनाकर उन्हे वीयना के शराबखानो मे बेचता और उनसे होनेवाली थोड़ी-सी श्राय पर अपना गुज़र-बसर करता रहा। इसका कोई प्रमाण नहीं है कि हिटलर दीवारों को काग़ज से सजाने का काम किया करता था। यह भी सच नहीं है कि उसका असली नाम शिकल ग्रबर है। उसका पैत्तक नाम यही है, किन्तु उसके बाप ने, १८४२ मे ही इसे बदलकर, हिटलर कर दिया था । जब हिटलर १३ वर्ष का था तबही उसके पिता का देहान्त होगया। युवक हिटलर राजनीतिक-चर्चा मे दिलचस्पी लेने लगा। वह अखिल जर्मनवाद के पक्ष मे और समाजवाद तथा ग्रास्ट्रिया के राजवश के विरुद्ध बाते करता। सन् १६११ में वह म्युनिख ( बवेरिया ) गया, जहाँ वह अपने बनाये चित्रो को बेचकर गुज़र करता था । अगस्त १६१४ मे योरप मे युद्ध छिड़ने पर वह जमन-सेना मे वालटियर की हैसियत से भर्ती होगया। गैर-जर्मन श्रास्ट्रियन-हैन्सबर्ग-राजवश के प्रति घृणा होने के कारण उसने अपने देश की सेना में भर्ती होने से इनकार कर दिया । युद्ध की समाप्ति तक वह पश्चिमी मोर्चे पर अर्दली-सिपाही की भॉति काम करता रहा और लान्सकारपोरल से अधिक उसकी तरक्की नही हई । युद्ध के अन्तिम काल में गैस लग जाने से, थोड़े समय के लिये, उसकी दृष्टि ख़राब होगई । युद्ध की समाप्ति पर वह म्युनिख वापस आगया और युद्धोत्तर जर्मन-सेना मे गुप्तचर होगया । उसका कार्य राजनीतिक दलो, संस्थात्रो तथा व्यक्तियो की निगहबानी करना था । इस हैसियत से वह एक भोजन-क्लब के सदस्यों के सम्पर्क मे पाया, जो