पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/४३२

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हिटलर ४२७ ब्रिटेन से उसकी प्रतिद्वन्द्विता न हो, अपने साम्राज्य का विस्तार करना चाहता है । अपने देशवाशियो के लिए जर्मनी को नई भूमि जीतनी ही चाहिये, और यह भूमि पूर्व दिशा मे है । दक्षिण रूस ( यूक्रेन ) को भी विजय करके जर्मन किसानो को वहाँ बसाना आवश्यक है। किन्तु पूर्व दिशा मे पग धरने से पूर्व जर्मनी को अपने पीठ पीछे के पश्चिमी मार्ग को साफ कर लेना चाहिये । फ्रान्स का सर्वनाश कर देना ज़रूरी है। किन्तु इस उद्देश की सिद्धि के लिए जर्मनी को मित्र देशो की आवश्यकता है । ब्रिटेन और इटली, इस काम के लिए, स्वतः विचार मे आते हैं। दोनो ही योरप मे फ्रान्सीसी प्राधान्य के विरोधी हैं और दोनो को सहज ही अपने पक्ष मे किया जा सकता है । हिटलर श्रागे कहता है कि अपने नौसेना बढाने के आयोजन का त्याग कर और उपनिवेशो के वापस मिल जाने से जर्मनी बरतानिया की मित्रता प्राप्त कर सकता है । इटली की मित्रता तो और भी सस्ती पडेगी : केवल दक्षिणी-जर्मनटाइरोल का त्याग । इस प्रकार बरतानिया और इटली से दोस्ती करके जर्मनी फ्रान्स को पीस देगा। तब जर्मनी पूर्व की ओर बढ़ेगा, वाहियात बोलशेवी रूस को कुचल डालेगा और उसके सुविशाल नये प्रदेश को छीन लेगा। इस प्रकार एक शताब्दि के उपरान्त योरपीय महाद्वीप मे प्रथम वर्ग की जाति के २५ करोड़ जनो का एक जर्मन-साम्राज्य होगा। जबतक जर्मनी की स्थिति अपने महाद्वीप मे सुरक्षित न होजाय, तबतक समुद्र पार जर्मन-साम्राज्य के विस्तार के प्रश्न को स्थगित रखना चाहिये । अन्त में हिटलर लिखता है कि केवल इतना भर करने की आवश्यकता है । फिर तो, समुद्र पार के विस्तार जैसे प्रश्नो पर हमारा एक ही उत्तर होगा, और वह यह कि “या तो जर्मनी संसार में सर्वश्रेष्ठ शक्ति होकर रहेगा या फिर मिट जायगा ।” हिटलर का उत्थान--सर्व प्रथम १६२८ मे राष्ट्रीय समाजवादी दल ने राइख़ताग (पार्लमेट) के चुनाव में भाग लिया और दल के बारह सदस्य राइखताग में पहुंच गये। उन्हे कुल आठ लाख मत मिले। किन्तु विश्व-व्यापी अार्थिक संकट हिटलरके लिये वरदान सिद्ध हुआ, जिसने, १६३० में जर्मनीको जर्जरित कर दिया था । हिटलरने बडे-बड़े कारखानेदार पंजीपतियो को आश्वासन दिया कि वह साम्यवाद के उठते हुए तूफ़ान से उनकी रक्षा करेगा। इस प्रकार हिटलर