पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/४४०

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हिन्द-चीन

  • ह१

कर दिया । फलतः नात्सीदल उसकी कडी व्यक्तिगत शरलोचना करने लगा। जनवरी १६३३ मे हिडनबर्ग ने अपना रुख़ बदला और हिटलर को राइख़ का चासलर बना दिया। वृद्धावस्था के कारण उसका स्वा- स्थ्य ख़राब होगया था। पूर्वीय प्रशा मे अपनी ज़मीदारी पर वह मर रहा था कि, ३० जून १६३४ को, हिटलर ने साम्यवादियो तथा नात्सी- बिरोधियो के ख़िलाफ 'रक्त-स्नान' - काण्ड कर डाला। हिटलर के इस काण्ड के समर्थन मे हिडन- बर्ग के नाम से एक तार छपा,कितु यह सन्दिग्ध है कि तार हिडनबर्ग ने लिखा था। ८७ वघ्ं की अ्वस्था मे उसकी मृत्यु होगई । पूर्वीय प्रशा मे, उसक्री प्रथम विजय की भूमि पर, हिडनबर्ग की समाधि बनाई गई है | हिन्द-चीन-ेत्र० २,८१,००० वर्ग० और जन० २ , ४०,०°,०००, इस देश के पॉँच भाग हैं : कोचीन-चीन, अनाम, कम्बोडिया, तानकिंग और लाओस । अनाम तथा कम्बोडिया नाम मात्र के साम्राज्य थे | उनके अपने सम्राट् है, किन्तु वास्तव में फ्रान्स का रेजीडेण्ट उनका शासक था । हिन्दू-चीन का शासन-प्रबन्ध फ्रासीसी गवरनर-जनरल द्वारा किया जाता था। यह वहुत सम्पन्न देश है और यह फ्रांस के बहुमूल्य उपनिवेशो में से था। यह कृषि- प्रधान देश है । चावल और रवर भी पेदा होता है । जस्ता तथा टीन की खाने हैं | आबादी मंगोलियन है | भापाये कई प्रकार की बोली जाती हैं | फ्रासीसी शासन के विरुद्ध जनता में असन्तोष्र था । जापान का इस देश पर दाँत था । जून १६४० में फ्रास का पतन हो जाने पर, सितग्वर १६४० में, जापान ने हिन्द-चीन में अपने फौजी और हवाई अरड्ड कायम करने के लिये मतालबा