पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/४४४

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हूवर ४३६ सन्तान मानते हैं । वह अपने को सूर्यवशी कहते और अपने राजवंश को सूर्य से उत्पन्न बताते है । जापानी सम्राट उनके लिये परम पूज्य और पवित्र सूर्य का पुत्र है । कोई जापानी भूल से भी अपने सम्राट का नाम निरादरपूर्वक नही लेता । ऐसा होने पर वह हाराकीरी (आत्मघात) करके प्राण दे डालता है । विदेशो मे जापान का सम्राट 'मिकाडो' और स्वदेश मे 'तेनो' कहा जाता है। हिरोहितो पहला जापानी सम्राट है, जिसने, युवराज की अवस्था मे, अपने देश से निकल कर ससार-यात्रा की और इस कारण अनेक फौजी तथा अन्य सरकारी अफसरों ने वहाँ हाराकीरी कर डाली । जापान मे कहने को इंगलैण्डजैसी पार्लमेटरी शासन-पद्धति है, किन्तु सम्राट - मत्रि-मण्डल की नियुक्ति करता है। मत्रि-मण्डल की नियुक्ति इस बात को ध्यान मे रखकर कीजाती है कि छोटी धारा-सभा मे बहुमत सम्राट के पक्ष मे रहे। सम्राट को मत्रि-मण्डल को पदच्युत करने का भी अधिकार है । वह धारासभा को भी भग कर सकता है। कोई भी कानून उसी समय वैधानिक माना जाता है जबकि,दोनो धारासभाग्रो से स्वीकृत होजाने । के उपरान्त, उसपर सम्राट के हस्ताक्षर होजायें । __हूवर, हरबर्ट क्लार्क-अमरीका का भूतपूर्व राष्ट्रपति और राजनीतिज्ञ; १८७४ मे, एक लुहार के घर में पैदा हुआ; बचपन में ही अनाथ होगया; रिश्तेदारो ने पाला-पढाया-लिखाया; १८६५ मे खनिज ( माइनिग ) इजीनियर बना, १६१४ तक पॉच मुल्को मे नौकरी-धन्धा करता रहा, पिछले महायुद्ध के समय योरप मे था, लन्दन की अमरीकी रिलीफ कमिटी का अध्यक्ष बना, पीछे वेलजियम-सहायक कमीशन का प्रधान और १६१७-१६ मे अमरीका का खाद्यसामग्री-व्यवस्थापक और युद्ध-समिति का सदस्य । लडाई के बाद केन्द्रीय योरप में अमरीकी रिलीफ कमिटी का प्रधान रहा, उन मुल्को को हर प्रकार का माल मुहय्या किया जहाँ शत्रु का घेरा रह चुका था। १६२१-२८ तक अमरीकीव्यापारविभाग का मन्त्री रहा। इस हैसियत से देश की उन्नति करने के कारण उसकी बहुत प्रशंसा हुई । १६२६-३३ मे अमरीका का राष्ट्रपति रहा । हूवर 'रिप