पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/४६०

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कासाव्लंका-सम्मेलन

इटली २·४; बेलजियम २·३। इन देशों मे से अमरीका, रूस और फ्रांस मे कच्चा लोहा निकलता है, दूसरे देशो को ईसपात बनाने के लिये स्वीडन , फ्रांस और स्पेन से कच्चा लोहा ख्ररीदना पड्ता है। कच्चा लोहा (आयर्न और) भारत के पर्वत-प्रदेशो मे भि निकलता है।

   कासाव्लंका-सम्मेलन---जनवरी १६४३ के अन्तिम सप्ताह मे, अफ्रिका में, फ्रान्सीसी-मरक्को के प्रमुख नगर कासाव्लाका में, अमरीकी राष्ट्रपति रुज़वेल्ट और बरतानवी प्रधान मत्री मि° चचिल तथा दोनो देशों के सेना-विभागो के उच्च अफसरो के बीच, दस दिनो तक, लगातार सम्मेलन हुआ। मोशिये स्तालिन तथा जनरलिस्सिमो च्यांग कोई-शेक को भी इस सम्मेलन मे आमन्त्रित किया गया बताया जाता है। किन्तु अपने-अपने क्षेत्रों में युद्ध-संलत्र रहने के कारण वे सम्मेलन मे उपस्थित न होसके। किन्तु, कहा गया है कि, उन्हे सम्मेलन के प्रत्येक निधय से श्रवगत किया गया था। मि° चर्चिल ने इस सम्मेलन को अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण युद्ध-सम्मेलन और राष्ट्रपति रुज़वैल्ट ने इसे "बिला शर्त आत्म-समर्पन्न-सम्मेलन" कहा है। इस सम्मेलन में जो निधय किये गये, उन्हे प्रकाशित नही किय गया है, किन्तु मि° चर्चिल और प्रेसिडेन्ट रुज़वेल्ट ने जो व्त्कव्य दिये है, उनसे निम्नलिखित त्व्य स्पष्ट है:---
    (प्र) सन १६४३ मे ससार भर मे बुरी राश्ट्रो के विरुद्ध घनघोर प्राक-नशात्मक युद्ध किया जायेगा।
    (व)