पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/४६८

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गांधीजी का इक्कीस दिन का व्रत ४६३ लिनलिथगो के लिए लिखा। इस पत्र की न्तिम महल्वपूरण पक्तियॉ इस प्रकार हैं। गांधीजी लिखते है। आपने मेरे लिए कोई ऐसी गजाइश नही रहने दी है कि मै त्रत रखने से बचा रह सकू। मैं अत्यन्त स्पष्ट विवेक-बुद्धि के साथ ६ फवरी को ब्रत आरम्भ करू गा! आपके यह कहने पर भी कि वह एक प्रकार की '"राज- नीतिक हिसा" है, वह मेरे लिए उस न्याय के निमित्त सर्वोच्च न्यायालय से एक अपील होगी जिसे मै पसे प्रात्त करने में विफल रहा हूँ । " इसके बाद गाधीजी ने १० फवरी से अपना इक्कीस दिन का उपवास आग्राखोँ भवन मे रम्भ कर दिया। गांधीजी का इक्कीस दिन का व्रत -गोधीजी ने १० फवरी ४३ के प्रातः- काल से अपना २१ दिन का व्रत आमাख़ँ महल, पूना में (जहाँ वह राजबन्दी हैं) आरम्भ क्रिया था । सरकार ने गाधीजी को यह आज्ञा देदी थी कि ब्रत की अवधि मे वह अपनी इच्छानुसार अपने डाक्टरो से परामर्श ले सकेगे। गांधी- जी ने २१ दिन तक केवल जल- सेवन करके ब्रत रखा । जल को पीने के योग्य बनाने के निमित्त वह नीबू जब उनकी स्थिति इतनी अधिक ख़राब होगई कि जल तक उन्हे हज़्म नही होने लगा तब 'मौसमी' का रस मिलाकर पानी पिलाया जाता था । उनके उपवास-काल मे ता० ११ फवरी से बंबई के सुप्रसिद्ध डा० गिल्डर (पूर्व कांग्रेसी स्वास्थ्य-मंत्री ) और १५ फवरी से कलकत्ता के भारत-विख्यात डा० विधान चन्द्र राय ( कलकत्ता यूनिवर्सिटी के वाइस चान्सलर) गांधीजी के निकट रहे और समय-समय पर उनकी शारीरिक- परीक्षा करते रहे। डा० सुशीला नायर तो हर समय गाधीजी के निकट रही। यह उनकी प्राइवेट चिकित्सिका है उन्होके साथ केद हैं | श्रीमती सरोजिनी नायडू ने गांधीजी की परिचर्या बड़ी तत्परता से की । सरकार की ओर से गाधीजी के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए तीन डाक्टर नियुक्त किये गये थे : मेजर-जनरल अर०एस ० केडी, लेफ़्टिनेट- कुनल एम० जी० भण्डारी तथा लेफ्रटिनेट-कर्नल बी० जी० शाह । प्रतिदिन इन ६ डाक्टरो के हस्ताक्षर सहित गांधीजी के दैनिक स्वास्थ्य- सबंधी पत्रिका समाचार-पत्रो मे प्रकाशित होती रही । डा० राय, डा० गिल्डर, का थोडा-सा रस भी जल के साथ मिला लेते थे।