पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/४७४

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४६३ व्य निस ट्य निस---उत्तरी अफरीका में फ्रान्स के 'सरक्षण' मे एक देश, जिसका अरबी नाम अफरी किया है; क्षेत्र० ४८,००० वर्ग; जन० २६ लाख, जिसमे १,०८,००० फ़रान्सीसी, ६४,००० अतालवी ( इटालियन ), और ७,००० माल्टावासी हैं; किन्तु इटली का दावा है कि 'अफरी किया' मे १,१५,००० अतालवी और केवल ६०,००० फरान्सीसी हैं । ट्य निस की आबादी मे २३,६०,००० अरबी-भाषा-भाषी मुसलमान हैं। नाममात्र के लिये सिद्दीक अहमद वे ( जिसका जन्म १८६२ मे हुआ) यहाँ का शासक है, किन्तु वस्तुतः शासन-सूत्र फरान्सीसी रेज़िडेन्ट-जनरल के हाथ में है। गवर्नमेट के ग्यारह सदस्यो मे आठ फरान्सीसी हैं। रेज़िडेन्ट-जनरल फरान्सीसी वैदेशिक मन्त्री के प्रति उत्तरदायी है । फरान्सीसी साम्राज्यवादियो की सेना ट्य निस में स्थायी रूप से रहती रही है । ट्य निशिया बडा उपजाऊ देश है, विशेषतः खनिज पदार्थ वहाँ बहुतायत से निकलते हैं । ___अपने देश-वासियो की आबादी के अनुपात के आधार पर इटली ट्य निशिया का दावीदार रहा है । १६वी शताब्दि के मध्यकाल से अतालवी वहाँ जाकर बसने शुरू हुए । सिसिली और दक्षिण इटली से विशेषकर अतालवी यहूदी अधिक सख्या मे वहाँ जाकर पहले बसे । इटली ट्य निशिया पर कब्जा करने ही वाला था कि, १८८१ मे, फरान्सीसियो ने ट्य निशिया को अधिकृत करके उसे अपना 'संरक्षित' देश बना लिया। ट्य निशिया मे अतालवी एक प्रवासी की भॉति रहते हैं, किन्तु वहाँ उन्होने सांस्कृतिक आधिपत्य कायम कर लिया है। उनके अपने मदरसे हैं और फासिस्त संगठन भी। ट्य निशिया की अरब जनता मे प्रबल राष्ट्रीय भावना जाग्रत है, और अखिल-अरबवाद की भावना भी। अरबो मे 'पुरातन', नई दस्तूर और तीसरी हबीब बरगीबा की, पार्टियाँ हैं । वर्तमान महायुद्ध मे ट्य निशिया पिछले दो वर्षों से युद्ध-क्षेत्र बना हुआ था। मई १९४३ मे संयुक्त राष्ट्रो की वहाँ भारी विजय हुई और उन्होनेअमरीकियो, बरतानियों और आजाद फरान्सीसियो–ने जमनो और अतालवियों को वहाँ से निकाल भगाया। ट्य निशिया की इस विजय से लडाई की दिशा मे महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुअा है ।