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इटली
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इटालियन नौ-सेना में ४ युद्ध-पोत, २२ क्रूज़र, ५६ ध्वंसक, ७२ टारपीडो बोट और १०५ पनडुब्बियॉ हैं। अधिकांश जहाज़ आधुनिक ढंग के हैं। पराजित होते जाने पर भी भूमध्यसागर में इटली अपनी सामरिक स्थिति पर बहुत घमण्ड रखता है।

इटली की भूमि में कोयला और लोहा बिलकुल नहीं है। उसके उद्योग-व्यवसाय आयात पर निर्भर हैं। ४० लाख इटालियन विदेशों में बसे हैं। अधिकांश अमरीका में हैं। इटली का व्यापारिक संबंध विशेषतः जर्मनी, सयुक्त राज्य अमरीका, ब्रिटेन और स्विट्ज़रलैण्ड से रहा है। इटली के अफ्रीकन साम्राज्य मे ३०,००० से अधिक इटालिन नहीं हैं। इटली और जर्मनी मे घनिष्ट मित्रता है और वर्तमान युद्ध मे यह दोनों राष्ट्र मिलकर ब्रिटेन आदि मित्रराष्ट्रों से युद्ध कर रहे हैं। इटली का बलकान राष्ट्रो में हित है। जर्मनी अपनी सेनाएँ भेजकर उसकी मदद कर रहा है।

४ अगस्त १९४० को इटली की सेनाओं ने ब्रिटिश शुमालीलैण्ड पर आक्रमण किया था। १९ अगस्त १९४० को अँगरेज़ी सेनाएँ वहाँ से हटा लीगई। इस तरह इटली का इस प्रदेश पर अधिकार होगया।

९ दिसम्बर १९४० को मित्र-राष्ट्रो की अफ्रीका-स्थित सेनाओं ने सिद्दी वरानी में आगे बढ़ी हुई इटली की सेनाओं पर हमला किया। दो दिन बाद इस स्थान पर अँगरेज़ों का अधिकार होगया। इस युद्ध में भारतीय सैनिकों ने अभूतपूर्व वीरता का परिचय दिया। प्रायः ६००० इटालियन बन्दी बनाये गये। अँगरेज़ी सेनाएँ पश्चिम की ओर बढ़ीं और उन्होंने, १७ दिसम्बर १९४० को, सोलुम, कोपुज्ज़ो तथा लीबिया के तीन अन्य सैनिक स्थानों को ले लिया। इसके बाद वे वार्डिया तथा डूर्ना की ओर बढी। ३ जनवरी १९४१ को अँगरेज़ों का वार्डिया पर अधिकार होगया। तदनन्तर वे तुवरुक की ओर बढ़े। फर्वरी १९४१ के प्रथम सप्ताह में साइरीन तथा वेनग़ाज़ी पर ब्रिटिश सेनाओं का अधिकार होगया। इसके बाद ब्रिटिश सेनाओं ने इरीट्रिया, इटालियन शुमालीलैण्ड तथा अवीसीनिया पर आक्रमण करना प्रारम्भ कर दिया। अँगरेज़ो की इस प्रकार विजय पर विजय हो रही थी कि सहसा ४ अप्रैल को नाज़ी सेना ने वेनग़ाज़ी पर आक्रमण कर दिया। वहॉ से अँगरेज़ी