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इराक
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फलतः अँगरेज़ो ने, मुस्लिम रष्ट्रों के साथ, यातायात के मार्ग को खुला रखने के लिए, १७ अप्रेल १९४१ को, कुछ भारतीय सेनाऍ बसरा में भेजी।

इसके कुछ दिनों बाद ही इराक़ में क्रन्ती हो गई। रशीदअली ने सेना की सहायता से नई सरकार कायम कर ली। जब अँगरेज़ो ने बसरा(इराक़) में अपनी और कुछ फौजे सुरक्षा के लिए भेजनी चाही तो रशीदअली ने आपत्ती की। बहुत प्रयत्न करने पर भी ब्रिटेन के साथ समभौता न हो सका। २ मई १९४१ को इराक़ की सेना ने इराक़-स्थित अँगरेज़ी हवाई अड्डे हब्बानिया पर गोले बरसाये और इस तरह युद्ध शुरू होगया। नाज़ी सेना ने गुप्त रूप से रशीदअली को सहायता दी। मार्शल पेताॅ ने जर्मनी को सीरिया के हवाई अड्डो का उपयोग करने की आज्ञा दे दी। नाज़ी वायुयान रशीद अली की सहायता के लिए सिरीया मे उतरने लगे। परन्तु, बीच मे क्रीट का युद्ध आरम्भ हो जाने से नाज़ी, रशीदअली को सहायता न पहुँचा सके। ८ मई को रशीदअली बग़-

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दाद छोड़कर भाग गया। २३ मई १९४१ को इराक़ के भूतपूर्व रीजेट अमीर अब्दुल्ला इराक़ मे लौट आये। ३१ मई १९४१ को ब्रिटेन तथा इराक़ मे संधि हो गई। पुरानी सरकार फिर स्थापित हो गई। बादशाह फैज़ल द्वितीय अभी बालक है, किन्तु ब्रिटेन के शासनादेश और रशीदअली द्वारा उठाये गये उपद्रव तथा नाज़ियो की पिछली विफलता के कारण इस समय इराक़ मे शान्ति और व्यवस्था है। किन्तु युद्ध की वर्तमान गति को देखते हुए आज यह कहना कठिन है कि क्या होगा।