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ईरान
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नये समझौते की वार्त्ता शुरू की जाय। किन्तु मंत्रिमण्डल ने आपके परामर्श पर ध्यान नहीं दिया और मुसोलिनी को ढील देने की नीति बरती गई। इस कारण, २० फ़रवरी १९३८ को, आपने वैदेशिक-मंत्रि-पद से त्याग-पत्र दे दिया। तब उन्होने स्वर्गीय प्रधान मंत्री चेम्बरलेन की सन्तुष्टीकरण नीति (Appeasement policy) का दृढता से विरोध किया। सितम्बर १९३९ में उन्हे उपनिवेश-मंत्री (Minister for Dominions) बनाया गया। लार्ड लोथियन (संयुक्तराज्य अमरीका के राजदूत) की मृत्यु के बाद, जब वैदेशिक मंत्री लार्ड हेलीफेक्स को उनके स्थान पर राजदूत बनाकर अमरीका भेज दिया गया, तब श्री ईडन फिर वैदेशिक-मत्री बना दिये गये।


ईरान--यह फारिस का आधुनिक नाम है। इसका क्षेत्रफल ६,२८,००० वर्गमील तथा जनसख्या १,५०,००,००० है। ईरान का शासक शाह कहलाता है। इसकी राजधानी तेहरान है। पहले यह बड़ा शक्तिशाली राज्य था। सन् १९०० से इसमे आन्तरिक कलह मचा। सन् १९०६ की राज्यक्रान्ति के बाद इसमे वैधानिक शासन की स्थापना की गई। सन् १९०७ में, रूस-ब्रिटेन-सन्धि के अनुसार, उत्तरी ईरान, रूस तथा दक्षिणी भाग ब्रिटेन के प्रभाव-क्षेत्र में आगये।

विगत विश्वयुद्ध मे ईरान तटस्थ रहा था। सन् १९१७ की रूसी राज्य-क्रान्ति के बाद रूसी सरकार ने ब्रिटेन-रूस-सन्धि (१९०७) का अन्त कर दिया और ईरान मे समस्त रूसी अधिकारो का परित्याग कर दिया। सन् १९१८ में ईरान से अँगरेज़ी सेना भी वापस बुला ली गई। इस समय रिज़ा ख़ॉ नामक एक सैनिक अफसर ने राष्ट्रीय आन्दोलन का संचालन किया। सन् १९२० में वह युद्ध-मंत्री बन गया और सन् १९२२ में प्रधान मंत्री। जब फारिस का विलासी शाह यूरोप को गया तो, उसकी अनुपस्थिति में,