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एस्टोनिया
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चुने गये। सन् १९२७-३० में भारतीय रायल कमीशन--साइमन कमीशन--के सदस्य थे। सन् १९३०-३१ में डची ऑफ् लैकास्टर के चान्सलर रहे और सन् १९३१ में पोस्ट मास्टर जनरल हुए। सन् १९३१ से वह म़जदूर-दल के उपनेता रहे। सन् १९३५ में जब मज़दूर-दव के नेता जॉर्ज लेसबरी की मृत्यु हो गई, तब वह उसके नेता चुने गये। कई

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वर्षों तक पार्लमेंट में विरोधी-दल के नेता रहने के बाद आज मेजर मज़दूर-दल की ओर से ब्रिटिश मंत्रि-मणडल में चर्चिल के नायब यानी सहकारी प्रधान-मंत्री (Deputy Prime Minister) हैं। राजनीतिक दृष्टि से मेजर एटली मज़दूर-दल के वाम तथा दक्षिणा पक्ष के मध्य मे रहते है। आपने चर्चिल के स्वर में स्वर मिलाकर कहा है कि अटलाटिक चार्टर का लाभ भारत को नही मिलना चाहिए।

एस्टोनिया--यह एक छोटा बाल्टिक राज्य है जो सोवियत रूस के उत्तर में है। इसका क्षेत्रफल १८,००० वर्गमील तथा जन-संख्या १२,००,००० है। सन् १९१८ तक यह रूस का एक प्रान्त था। इसी वर्ष मे वह एक स्वाधीन राज्य बन गया। तब से वह साम्यवाद-विरोधी नीति का समर्थक रहा। इस देश में जर्मन अल्पमत में है, परन्तु उन्हे स्वायत्त-शासन का अधिकार रहा है। कृषि, गोरस-व्यवसाय (डेरी फार्मिग्) तथा पशु-पालन ही यहॉ के मुख्य उद्योग हैं। जर्मनी और ब्रिटन को यहॉ से माल भेजा जाता है। सन् १९३५ में यहाँ अधिनायक-तंत्र की स्थापना हुई। इस देश मे कोई राजनीतिक-दल नहीं है। जो उम्मीदवार सरकार द्वारा पसन्द किये जाते हैं, वे ही चुनाव में खड़े हो सकते हैं। वर्त्तमान यूरोपीय युद्ध के आरम्भ