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औकिनलैक
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ओ--औ



ओटावा-समझौता-–सन् १९३२ मे ओटावा (कनाडा) में,साम्राज्य-आर्थिक-सम्मेलन हुआ था, जिसमे ब्रिटिश साम्राज्यान्तर्गत सभी देशो के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए थे। इस सम्मेलन में पारस्परिक तटकर (Tariff) सबंधी निश्चय निर्धारित किये गये, जो ओटावा समझौता के नाम से प्रसिद्ध है।

ओटो, डा० स्ट्रैसर--एक निर्वासित जर्मन राजनीतिज्ञ, हिटलर-नीति-विरोधी काले मोर्चे (Black Front) का नेता। १९३० तक डा० ओटो हिटलर का अनुयायी रहा। इसने नाज़ी दल में एक समाजवादी पक्ष खड़ा किया। सन् १९३० में वह हिटलर के दल से अलग होगया। उसने “क्रान्तिकारी राष्ट्रीय समाजवादी-दल” क़ायम किया जो बाद मे काले मोर्चे (Black Front) के रूप में बदल गया। इसके कार्यक्रम मे नाज़ीवाद तथा समाजवाद का मिश्रण था। सन् १९३३ मे हिटलर ने डा० ओटो को जर्मनी से निर्वासित कर दिया। वह ज़ेकोस्लोवाकिया तथा स्विट्ज़रलैण्ड में भ्रमण करके हिटलर के विरुद्ध प्रचार करने लगा।

औकिनलैक--आपका पूरा नाम है जनरल सर क्लौड जॉन इरे औकिनलक। आपका जन्म सन् १८८४ में हुआ। दक्षिण-पश्चिमी समुद्रतटीय प्रदेश-इँगलैंड--में औकिनलैक ने जर्मन-आक्रमण से रक्षा के लिए सेना का संगठन किया। मई १९४० मे उत्तरी नार्वे में मित्रराष्ट्रो की सेना का संचालन किया। इसके बाद इँगलैंड में पोर्ट् समाउथ से ब्रिस्टल तक ५०० मील लम्बे समुद्री-तट की रक्षा के लिए ६ मास तक आपने बड़े साहस से योजना-कार्य किया।

आपने वैलिगटन कालिज में शिक्षा प्राप्त की है। सबसे प्रथम वह भार-