प्रास्ताविक दक्षिण अफ्रीकामे हिंदुस्तानियोको सत्याग्रहकी लड़ाई पाठ वरस चली । इस सग्रामके लिए ही 'सत्याग्रह' शब्दकी खोज की गई और प्रयोग किया गया। बहुत दिनोसे मेरी इच्छा थी कि इस सग्रामका इतिहास लिखू । उसका कितना ही मग तो केवल में ही लिख सकता है। कौन-सी बात किस हेतुसे की गई, इसका पता तो युद्धका सचालन करनेवालेको ही हो सकता है । राजनीतिक क्षेत्रमें बड़े पैमाने पर यह पहला ही प्रयोग था । इसलिए इस सत्याग्रहके सिद्धातका विकास कैसे हुआ इसकी जानकारी लोगोको हो जाना हर हालतमे जरूरी समझा जायगा । पर इस वक्त तो हिंदुस्तान मे सत्याग्रहके लिए विद्यान क्षेत्र है । वीरम- गाम' की चुगीकी एक छोटी-सी लडाईसे इसका अनिवार्य क्रम प्रारम हुमा है। स्वीरमगामकी चुगीकी लडाईमे निमित्त था बढवाण' का साबुचरित परोपकारी दरजी भाई मोतीलाल । १९१५ मे में विलायतसे वापस भाकर काठियावाड या रहा था। तीसरे दर्जेमे सवार था । वढवाण स्टेशनपर यह दरकी अपनी छोटी-सी टोली लेकर आया था। वीरम- गामकी कथा पोडी-सी सुनाकर उसने मुझसे कहा "इस क्रप्टको काटिए आपने काठियावाडमें जन्म लिया है, इसे सार्थक कीजिए।" उसकी भाखोमे दृढता और करुणा दोनों थी । मैने पूछा, "तुम जेल जानेको तैयार हो ?" तुरत जवाब मिला- "हम फासी बढने तक के लिए तैयार है ।" 'वीरमगाम महमावासे ४० मील पश्चिममें एक कसबा है। बढ़वाण वीरमगामसे ४० मील पश्चिममें पढ़ता है ।
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