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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/१११

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f १०४ afक्षण अफ्रीकाका सत्याग्रह रहना पडता । ज्योही उसे आग भडकती दिखाई दे, रत घटा वजा देना होता। उसे सुनकर जैसे दिल्लीको देखकर चूहे अपने विलमे घुस जाते है वैसे ही जानलेवा गोलेके आनेको सूचनाका घटा बजते ही नगरवासी अपनी-अपनी छिपनेकी जगहमें छिप जाते और अपनी जान बचा लेते। प्रभु इस अमूल्य सेवाको सराहना करते हुए लेडी स्मिथ के फौजी अफसरने लिखा है कि प्रभुसिहने ऐसी निष्ठासे काम किया कि एक वार भी वह घटा बजानेसे नहीं चूका । यह बताने की जरूरत शायद ही हो कि प्रभुसिंहको खुद तो सदा खतरे में ही रहना पडता था । यह बात नेटालमे तो मगहूर हुई हो, लार्ड कर्जन ( हिदुस्तान के तत्कालीन वाइसराय) के कानतक भी पहुची। उन्होने प्रभुसिहको मेट करनेके लिए एक काश्मीरी जामा भेजा और नेटालकी सरकारको लिखा कि प्रभुसिंहको यह उपहार समारोह पूर्वक प्रदान किया जाय और जिस कारगुजारी के लिए उसे यह दिया जा रहा है उसका जितना ढिढोरा पीटा जा सकता हो पीटा जाय । यह काम डर्बनके मेयरको सौपा गया और डर्बनके टाउनहालमे सार्वजनिक सभा करके प्रभुसिंहको उक्त उपहार अर्पित किया गया। यह दृष्टात हमे दो बाते सिखाता है एक तो यह कि हम किसी भी मनुष्यको तुच्छ न समझे । दूसरी यह कि डरपोक -से-डरपोक आदमी भी अवसर आनेपर वीर बन सकता है ।

१० :

लड़ाईके बाद युद्धका मुख्य भाग १९०० मे पूरा हो गया । इस बीच लेडी स्मिथ, किवरली और मेफेकिंगका छुटकारा हो गया