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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/१३२

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भलमनसीका बदला - खूनी कानून १२५ कारने इस भारी भलमनसीका बदला किस प्रकार दिया, इसे हम अगले प्रकरण में देखेंगे ।

११ :

भलमनसीका बदला - खूनी कानून परवानोंका रद्दोबदल होनेतक हम १९०६ में प्रवेश कर चुके थे । १९०३ में में ट्रांसवालमे फिर दाखिल हुआ था। उस सालके लगभग मध्यमे मेने जोहान्सवर्गमे दफ्तर खोला। यानी दो बरस ऐशियाटिक महकमेके हमलों का सामना करनेमें ही गये । हम सबने मान लिया था कि परवानों का झगडा ते होते ही सरकारको पूरा संतोष हो जायगा और भारतीय जनताको कुछ शांति मिलेगी। पर उसके भाग्य- में शांति थी ही नही । मि० लायन कटिसका परिचय पिछले प्रकरणमे दे चुका है। उन्होने सोचा कि हिंदुस्तानियों के नये परवाने ले लेनेसे ही गोरोंका उद्देश्य सिद्ध नही होता । उनकी दृष्टिसे बडे कार्यों का आपसके समझौते से होना ही काफी नही था। ऐसे कामो के पीछे कानूनका वल होना चाहिए। तभी उनकी शोभा है और उनके मूलभूत सिद्धातोंकी रक्षा हो सकती है । कटिसका विचार था कि हिंदुस्तानियों को जकड़ने के लिए कोई ऐसा काम किया जाय जिसका असर सारे दक्षिण अफ्रीकापर पड़े और अंतमे दूसरे उपनिवेश भी उसका अनुकरण करें। उनकी रायमें जबतक दक्षिण अफ्रीका- का एक भी दरवाजा हिंदुस्तानियों के लिए खुला रहेगा तबतक ट्रांसवाल सुरक्षित नही माना जा सकता। फिर उनकी दृष्टि- से सरकार और भारतीय जनता के बीच समझौता होनेसे तो भारतीय जनताकी प्रतिष्ठा और वुढ जाती थी। उनका