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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/१३७

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१३० efore usोकाका सत्याग्रह मिल सकती है, जुर्माना किया जा सकता है और अदालत उचित समझे तो देशनिकालेका दड भी दे सकती है। बच्चो की ओरसे मायापको दर्खास्त देनी होगी और उंगलियो- के निशान आदि लेनेके लिए उन्हें रजिद्वारके सामने हाजिर करनेकी जिम्मेदारी भी मां-बापपर होगी। मा-बापने इस कर्तव्यका पालन नही किया हो तो १६ वरसका होनेपर वालकको खुद यह फर्ज अदा करना चाहिए। उसके अदा न किये जानेपर मां-बाप जिस-जिस दंडके पात्र होते है उस दंडके अधिकारी १६ की उनको पहुंचते हुए लड़की लड़के भी माने जायगे । प्रार्थीको जो परवाना या रजिस्टरीका सार्टिफिकेट दिया जाय उसे हर पुलिस अफसरके सामने, जब ओर जहां वह मागा जाय, पेश करना लाजिमी होगा । उसे पेश न करना अपराध माना जायगा और अदालत उसके लिए कैद या जुर्मानेकी सजा दे सकती हैं। राह चलते व्यक्तिसे भी परवाना पेश करनेको कहा जा सकता है। परवानेकी जांच के लिए पुलिस अफसर घरमें भी घुस सकते है। ट्रांसवालके बाहरसे आनेवाले भार- तीय स्त्री-पुरुषको जाच करनेवाले अफसरके सामने अपना परवाना पेश करना ही होगा । कोई कामसे अदालत में जाय या मालके दफ्तरमे व्यापार या बाइसिकल रखनेको अनुमति- पत्र लेने जाय तो वहां भी अफसर उससे परवाना मांग सकता है। अर्थात् कोई भारतीय किसी भी सरकारी दफ्तर- मे उस दफ्तरसे संबद्ध कार्यके लिये जाय तो अफसर उसकी प्रार्थना स्वीकार करनेसे पहले उससे उसका परवाना मांग सकता है। उसे पेश करने या उसे रखनेवाले व्यक्तिसे अधिकारी इस वारेमें जो कुछ पूछे उसे बतानेसे इन्कार करना भी अपराध माना जायगा और अदालत उसके लिए भी जेल या जुर्मानेकी सजा दे सकती है। दुनियाके किसी भी हिस्सेमे स्वतंत्र मनुष्यो के लिए इस