'सत्याग्रह' बनाम 'पैसिव रेजिस्टेंस' L संभावना है। सभामे दी हुई दलील और पैसिव रेजिस्टेस और आत्मबलका भेद समझाने के लिए जो कुछ और कहनेकी आवश्यकता है उसे मिलाकर में दोनोके बीच रहनेवाले विरो- धको समझानेकी कोशिश करूंगा। 'पैसिव रेजिस्टेस' इन दो शब्दोंका उपयोग अंग्रेजी भाषामे पहले-पहल किसने किया और कब किया, इसका पता तो मुझे नही है । पर ब्रिटिश जनतामे जब-जब किसी छोटे समुदाय- को कोई कानून पसंद नहीं आया तब-तब उसने उस कानून के विरुद्ध विद्रोह करनेके बदले उस कानूनके सामने सिर न झुकाने- का 'पैसिव अर्थात हलका कदम उठाया और उसके फलस्वरूप जो सजा मिले उसे भुगत लेना पसंद किया। कुछ वरस पहले जब ब्रिटिश पार्लामेटने शिक्षाका कानून ( एनकेशन- ऐक्ट) पास किया तब डाक्टर क्लिफडके नेतृत्वमे 'नान- कनफार्मिस्ट नामक इसाई सम्प्रदायने 'पैसिव रेजिस्टेस' का अवलंबन किया था । इंगलैडकी स्त्रियोन मताधिकार पानेके लिए जो जव- दस्त आन्दोलन किया था उसे भी 'पैसिव रेजिस्टेस का नाम दिया गया था। इन दोनो आन्दोलनोको ध्यानमे रखकर ही मि० हाँस्किनने कहा कि 'पैसिव रेजिस्टेस' निर्वक अथवा मता- धिकार-रहितका हथियार है। डाक्टर क्लिफर्डके पक्षको मताधिकार प्राप्त था, पर आम समामें उसकी संख्या इतनी कम थी कि वह वोटके वलसे शिक्षा कानूनका पास होना नही रोक सका, अर्थात् यह पक्ष संख्यावलमे कमजोर ठहरा । अपने उद्देश्यकी सिद्धिके लिए यह पक्ष शस्त्रका उपयोग कमी करता ही नहीं, सो बात नहीं थी। पर इस काममें उसका उपयोग करके वह सफल नही हो पाता । सुव्यवस्थित राज्य- तंत्रमे हर वक्त यकायक बगावत करके ही हक हासिल करने- का तरीका चल ही नही सकता । फिर डाक्टर क्लिफर्डके पक्षके कुछ ईसाई सामान्य रीतिसे हथियारका इस्तेमाल हो १०
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