सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/१६०

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

1 विलायतको शिष्ट-मण्डल 1 १५३ हाजी वजीर अली आघे मलायी कहे जा सकते है । उनके आप हिंदी मुसलमान और मां मलायी थी। इनकी मादरी जबान डच कही जा सकती है; पर अग्रेजी भी इतनी पढ़ ली थी कि डच और अग्रेजी दोनो अच्छी तरह बोल सकते थे । अंग्रेजीमें भाषण करनेमे उन्हें कही अटकना नही पडता । अख- वारोंमें पत्र लिखनेका अभ्यास भी कर लिया था। द्वासवाल ब्रिटिश इंडियन एसोसियेशनके सदस्य थे और लंबे अरसेसे सार्वजनिक कामोंमे हिस्सा लेते आ रहे थे। हिंदुस्तानी भी अच्छी तरह बोल लेते थे । उनका ब्याह एक मलायी स्त्रीसे हुला था और इस स्त्रीसे उनके बहुतसे बाल बच्चे थे । विकायत पहुंचते ही हम दोनो काममे जुट गये । उपनिवेश सचिव और भारत सचिवके सामने जो आवेदनपत्र पेश करना था उसका भसविदा तो जहाजपर ही बना लिया था । उसको छपा डाला। लार्ड एल्गिन उपनिवेश मंत्री थे, कार्ड मॉर्के भारत- मंत्री थे। हम हिंदके दादा (दादाभाई नवरोजी) से मिले 1 फिर उनके जरिये काग्रेसकी ब्रिटिश कमेटी से मिले । हमने अपना पक्ष उसे सुनाया और बताया कि हम तो सव पक्षोको साथ लेकर काम करना चाहते हैं। दादाभाईकी तो यह सलाह थी ही । कमेटी को भी यह ठीक जान पड़ा। इसी तरह हम सर मंचेरजी भावनगरीसे मिले। उन्होने भी खूब मदद की। इनकी और दादामाईकी भी सलाह थी कि लार्ड एल्गिनके पास जो शिष्ट-मण्डल जाय उसका नेता कोई तटस्थ और प्रसिद्ध एंग्लो इंडियन बनाया जा सके तो अच्छा है । सर मंचेरजीने कुछ नाम भी सुझाए । उनमे सर लेपल ग्रिफिनका भी नाम था । पाठकोको जान लेना चाहिए कि सर विलियम विल्सन हंटर इस वक्त जीवित नही थे। वह होते तो दक्षिण अफ्रीका के भारतीयोकी स्थितिसे उनका गहरा परिचय होनेके कारण वही शिष्ट-मण्डलके नेता हुए होते या उन्हीने