वक राजनीति अथवा क्षणिक हर्व १६३ एल्गिन और बड़ी सरकारने हमे धोखा दिया। हमे तो मदीरा- मे जितनी खुशी हुई थी, दक्षिण अफ्रीकामे उतनी ही मायूसी हुई। फिर भी इस कुटिलताका तात्कालिक परिणाम तो यही हुआ कि कौममे और जोश फैला और सब कहने लगे- "अब हमें चिता क्या है ? हमे क्या बड़ी सरकारकी सहायता के भरोसे लड़ना है ? हमे तो अपने बलपर और जिसका नाम लेकर हमने प्रतिज्ञा की है उस भगवान्के भरोसे लड़ना है। और हम सच्चे रहे तो टेढ़ी राजनीति भी सीधी हो ही जायगी " ट्रासवालमे उत्तरदायी शासनकी स्थापना हुई नई उत्तरदायी धारा सभाने जो पहला कानून पास किया वह था वजट और दूसरा कानून यही खूनी कानून (एशिया- टिक रेजिस्ट्रेशन ऐक्ट) था यह कानून ज्यो-का-त्यों उसी रूपने पास हुआ जिस रूपमें पहले बना और पास हुआ था । उसकी एक दफामे तारीख दी हुई थी। उसे बदलना तो अधिक दिन बीत जानेसे जरूरी हो हो गया था । अतः यह तारीख उसमे बदली गई । २१ मार्च १९०७ की एक ही बैठकमें इस कानूनकी सारी विधिया पूरी करके वह पास कर दिया गया। इस शाब्दिक परिवर्तनका कानूनकी सख्तीके साथ कोई संबंध नही था । वह तो जैसी थी वैसी ही बनी रही। अतः यह कानून रद हुआ था, इस बातको लोग सपनेकी तरह भूल गये । भारतीय जनताने अपनी रीतिके अनुसार आवेदन- पत्र आदि तो भेजे ही, पर इस तूतीकी आवाज उस नक्कार- खानेमे कौन सुनता ? इस कानूनके १ जुलाई १९०७ से जारी होनेकी घोषणा की गई थी और भारतीयोको ३१ जुलाई- के पहले परवानेके लिए दर्खास्त देनेको हुक्म दिया गया था । इतनी मुद्दत रखनेका कारण हिंदुस्तानियोपर कोई मेहर- वानी करना नही था । पद्धतिके अनुसार इस कानूनको बड़ी
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