१६४ दक्षिण अफ्रीकाका सत्याग्रह सरकारकी मंजूरी मिलनी चाहिए थी। इसमे कुछ वक्त लगना ही था। फिर उसके परिशिष्टके अनुसार परचे, परवाने वगैरह तैयार कराने ओर भिन्न-भिन्न स्थानोंमे परवाने- के दफ्तर ( परमिट आफिस) खोलनेमे भी कुछ वक्त लगता । इससे यह पाच-छ महीने की मुहलत ट्रासवाल सरकारने अपने ही सभीतके लिए दी थी ।
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अहमद मुहम्मद काछलिया शिष्ट- मण्डल जव विलायत जा रहा था तब एक अंग्रेज मुसा- फिरने जो दक्षिण अफ्रीकामे रह चुका था, ट्रासवालके कानून और हमारे विलायत जानेका कारण भी हमारे मुहसे सुना । वह तुरंत बोल उठा - " आप कुत्तेका पट्टा ( डॉग्स कॉलर) पहनने से इन्कार करना चाहते है ।" इस अंग्रेजने ट्रासबालके परवानेको यह नाम दिया । उसने यह बात पट्टेपर अपना हर्ष और भारतीयोके प्रति तिरस्कार प्रकट करने या अपनी हमदर्दी दिखानेके लिए कही, इसे मे उस वक्त नही समझ सका था और आज इस घटनाका उल्लेख करते समय भी इस बारे मे कोई निश्चय नही कर सकता । किसी भी मनुष्यके कथनका ऐसा अर्थ हमे नही करना चाहिए जिससे उसके साथ अन्याय हो। इस सुनीतिका अनुसरण करते हुए में यह माने लेता हू कि इस अंग्रेजने अपनी हमदर्दी दिखानेके लिए ऊपरके जैसे, भावना- की तसवीर खीच देनेवाले शब्द कहे। एक ओर द्वास- वाल सरकार हमे यह पट्टा पहनाने की तैयारी कर रही थी, दूसरी ओर भारतीय जनता इसकी तैयारी कर रही थी कि. यह पट्टा न पहनने के अपने निश्चयपर वह किस तरह