सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/१७२

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

अहमद मुहम्मद कालिया । १६५ कायम रहे और ट्रासबालकी सरकारकी नीति के विरोधमे किस तरह युद्ध किया जाय । विलायत और हिदुस्तान के अपने सहायको को पत्र लिखने और चाल परिस्थितिसे उनको परिचित कराते रहनेका काम तो चल ही रहा था। पर सत्याग्रहकी लडाई बाह्योपचारपर बहुत कम अवलंबित होती है। भीतरी उपचार ही सत्याग्रहमे अक्सीर उपचार होता है। अत. कौम के सभी अंग ताजे और चुस्त रहे, इसके यत्नमे ही नेताओंका समय जा रहा था । कौमके सामने एक महत्त्वका प्रश्न उपस्थित हुआ सत्या- ग्रहका काम किस मडलकी मारफत लिया जाय ? ट्रांस- बाल ब्रिटिश इंडियन एसोसियेशन मे तो बहुतसे सभासद थे। उसकी स्थापनाके समय सत्याग्रहका जन्म भी नहीं हुआ था। उस संस्थाको अनेक कानूनोका विरोध करना पडा था और आज भी करना था । कानूनोका विरोध करनेके अति- रिक्त उसे दूसरे राजनैतिक, सामाजिक आदि काम भी करने होते थे। फिर इस संस्थाके सभी सदस्योने प्रतिज्ञा की थी, यह भी नही कहा जा सकता था। इसके साथ-साथ सत्या- ग्रहमे सम्मिलित होनेसे उस संस्थाको जो बाहरकी जोखिमें उठानी पडती उनका विचार करना भी जरूरी था। सत्या- ग्रहकी लडाईको ट्रासवालकी सरकार राजद्रोह मान ले और ऐसा मानकर यह युद्ध चलानेवाली संस्थाओंको गैर- कानूनी घोषित कर दे तो ? इस सस्थाके जो सदस्य सत्याग्रही नहीं होगे उनकी स्थिति क्या होगी ? सत्याग्रह के पूर्व जिसने पैसा दिया हो उनके पैसेका क्या होगा ? ये बातें भी सोचने- की थी। अंतमे सत्याग्रहियोंका यह दृढ़ निश्चय था कि जो लोग अश्रद्धा, अशक्ति या दूसरे किसी भी कारणसे सत्या- ग्रहमें शामिल न हों उनके प्रति द्वेष न रखा जाय, इतना ही नही, उनके साथ बर्ताव करनेमे आजके स्नेह भावमें कोई अंतर